RPSC PYQ 3. प्रमुख राजवंशों के महत्वपूर्ण शासकों की राजनीतिक एवं सांस्कृतिक उपलब्धियाँ—गुहिल, प्रतिहार, चौहान, परमार, राठौड़, सिसोदिया और कच्छावा। मध्यकालीन राजस्थान में प्रशासनिक तथा राजस्व व्यवस्था। MOCK TEST - 2026
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कुल प्रश्न: 125 | कुल अंक: 125 | सही पर: +1 | गलत पर: -1/3
प्र. 1: निम्नलिखित ऐतिहासिक तथ्यों/स्थलों (सूची-I) का उनसे संबंधित व्यक्तियों/राजवंशों (सूची-II) के साथ सही मिलान कीजिए तथा नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर का चयन कीजिए (मई 2026 के अद्यतन परिप्रेक्ष्य में):
सूची-I (ऐतिहासिक तथ्य/स्थल) (A) बागोर सभ्यता का उत्खनन कार्य (B) अजमेर में संस्कृत (कंठभरण) महाविद्यालय का निर्माण (C) राठौड़ वंश की मेड़तिया शाखा के संस्थापक (D) राजोरगढ़ (आभानेरी) का कलात्मक वैभव
सूची-II (संबंधित व्यक्ति/राजवंश) 1. गुर्जर-प्रतिहार काल 2. वी. एन. मिश्रा एवं वसंता शिंदे 3. राव दूदा जी 4. विग्रहराज चतुर्थ
कूट:
सही उत्तर: (A)
व्याख्या: (A) बागोर (भीलवाड़ा) कोठारी नदी के पास स्थित है, जिसकी खोज वी.एन. मिश्रा ने की तथा उत्खनन वी.एन. मिश्रा और वसंता शिंदे ने करवाया। (B) अजमेर में संस्कृत महाविद्यालय विग्रहराज चतुर्थ ने बनवाया था, जिसे कुतुबुद्दीन ऐबक ने तुड़वाकर 'अढ़ाई दिन का झोपड़ा' बनवाया। (C) राठौड़ वंश की मेड़तिया शाखा के संस्थापक राव जोधा के पुत्र राव दूदा जी थे। (D) राजोरगढ़ और आभानेरी का शानदार कलात्मक वैभव गुर्जर-प्रतिहार काल से संबंधित है।
प्र. 2: मेवाड़ के महाराणा सांगा द्वारा लड़े गए निम्नलिखित ऐतिहासिक युद्धों को उनके घटित होने के सही कालक्रमानुसार (पहले से बाद के क्रम में) व्यवस्थित कीजिए:
I. गागरोन का युद्ध II. खानवा का युद्ध III. खातौली का युद्ध IV. बयाना का युद्ध
सही कूट का चयन कीजिए:
सही उत्तर: (B)
व्याख्या: कालक्रम इस प्रकार है: 1. खातौली का युद्ध (1517 ई.) - राणा सांगा और इब्राहिम लोदी के मध्य। 2. गागरोन का युद्ध (1519 ई.) - राणा सांगा और मालवा के महमूद खिलजी द्वितीय के मध्य। 3. बयाना का युद्ध (फरवरी 1527 ई.) - राणा सांगा और बाबर की सेना के मध्य। 4. खानवा का युद्ध (17 मार्च 1527 ई.) - राणा सांगा और बाबर के मध्य, जिसमें सांगा की पराजय हुई थी।
प्र. 3: महाराणा प्रताप और मुगलों के मध्य हुए संघर्ष के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन सा कथन असत्य है?
सही उत्तर: (C)
व्याख्या: कथन (C) असत्य है क्योंकि 1585 ई. में महाराणा प्रताप ने गोगुन्दा को नहीं, बल्कि 'चावंड' को अपनी नई राजधानी बनाया था, जो अगले 28 वर्षों तक मेवाड़ की राजधानी रही। अन्य सभी कथन पूर्णतः सत्य हैं। दिबेर युद्ध (1582) को मेवाड़ का मैराथन कहा जाता है। 1584 में जगन्नाथ कछवाहा के नेतृत्व में अंतिम अभियान हुआ था। बदायूंनी ने हल्दीघाटी को गोगुन्दा का युद्ध कहा था।
प्र. 4: नीचे दो कथन दिए गए हैं, एक को अभिकथन (A) और दूसरे को कारण (R) के रूप में दर्शाया गया है:
अभिकथन (A): मारवाड़ के वीर सेनापति दुर्गादास राठौड़ ने विद्रोही शहजादे अकबर को दक्कन (दक्षिण भारत) में शरण दिलवाने के लिए पलायन करवाया। कारण (R): दुर्गादास राठौड़ मुगल सम्राट औरंगजेब का ध्यान मारवाड़ से हटाकर दक्षिण की ओर केंद्रित करना चाहते थे, ताकि मारवाड़ को मुगलों के सीधे आक्रमण से सुरक्षित किया जा सके।
उपर्युक्त कथनों के संदर्भ में सही कूट का चयन कीजिए:
सही उत्तर: (A)
व्याख्या: दुर्गादास राठौड़ (1638-1718) मारवाड़ राज्य के स्वामीभक्त सेनापति थे जिन्होंने औरंगजेब को कड़ी चुनौती दी। उन्होंने कूटनीति का प्रयोग करते हुए विद्रोही शहजादे अकबर को दक्षिण भारत ले जाने का निर्णय लिया, जिसका मुख्य कारण औरंगजेब का ध्यान मारवाड़ से भटकाना था। अतः अभिकथन और कारण दोनों सही हैं तथा कारण अभिकथन की पूर्ण व सही व्याख्या करता है।
प्र. 5: राजपूत शासकों एवं उनके दरबार में आश्रित विद्वानों/चित्रकारों के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन सा युग्म सही सुमेलित नहीं है?
सही उत्तर: (D)
व्याख्या: विकल्प (D) सुमेलित नहीं है। दलपति मिश्र और बनारसी दास, मारवाड़ के महाराजा जसवंत सिंह के दरबारी विद्वान थे। महाराणा मोकल के दरबार में योगेश्वर और भट्टविष्णु जैसे विद्वान तथा मना, फना व विसल जैसे शिल्पी निवास करते थे। सवाई जयसिंह के दरबार में विद्याधर (वास्तुकार), रत्नाकर और जगन्नाथ थे। महाराणा कुम्भा के दरबार में जैन मुनि जिनसेन सूरी, टिल्लाभट्ट आदि थे। महाराणा प्रताप के दरबारी पंडित चक्रपाणी मिश्र थे जिन्होंने 'मुहूर्त्तमाला' लिखी।
प्र. 6: राजस्थान में प्रजामंडल आन्दोलनों की स्थापना के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
I. बीकानेर प्रजामण्डल की स्थापना 1936 ई. में वैद्य मघाराम व लक्ष्मणदास स्वामी द्वारा कलकत्ता में की गई थी। II. मेवाड़ प्रजामण्डल की स्थापना 24 अप्रैल 1938 को माणिक्य लाल वर्मा द्वारा की गई, जिसके प्रथम अध्यक्ष बलवंत सिंह मेहता थे। III. करौली प्रजामण्डल की स्थापना 1939 ई. में त्रिलोक चन्द माथुर, चिरंजीलाल शर्मा व कुँवर मदन सिंह द्वारा की गई थी। IV. कोटा राज्य प्रजामण्डल की स्थापना 1939 ई. में मीठालाल व्यास की अध्यक्षता में मांगरोल में की गई थी।
उपर्युक्त में से कौन से कथन सही हैं?
सही उत्तर: (A)
व्याख्या: कथन IV असत्य है। कोटा राज्य प्रजामण्डल की स्थापना 1939 ई. में पंडित नयनूराम शर्मा और पंडित अभिन्न हरि द्वारा की गई थी, और इसका पहला अधिवेशन मांगरोल (बारां) में नयनूराम शर्मा की अध्यक्षता में हुआ था। मीठालाल व्यास का संबंध जैसलमेर प्रजामंडल (1945) से है। शेष तीनों कथन (I, II, III) ऐतिहासिक दृष्टि से पूर्णतः सत्य हैं।
🏷️ [RPSC Agriculture Officer 2020] [RPSC Sub Inspector 14/09/2021] [RPSC Sr. Teacher Sanskrit-2022 Group A] [RPSC Research Assistant 2016]
प्र. 7: राजस्थान की ऐतिहासिक धरोहरों एवं उनकी अवस्थिति (नवीन 41 जिलों की प्रशासनिक रूपरेखा 2026 के परिप्रेक्ष्य में) के संबंध में निम्नलिखित में से कौन से कथन सही हैं?
1. बिजोलिया अभिलेख के अनुसार, राजस्थान की सबसे बड़ी खारे पानी की 'सांभर झील' का निर्माण चौहान वंश के शासक वासुदेव ने करवाया था। 2. अबुल फज़ल द्वारा 'बख्तरबंद दुर्ग' की संज्ञा से विभूषित रणथम्भौर दुर्ग वर्तमान सवाई माधोपुर जिले में स्थित है। 3. भारत का अजेय दुर्ग कहलाने वाले 'लोहागढ़ दुर्ग' का निर्माण जाट महाराजा सूरजमल ने भरतपुर में करवाया था। 4. भगवान विष्णु को समर्पित 9 मंजिला 'विजय स्तम्भ' का निर्माण राणा कुम्भा ने करवाया था, जिसके मुख्य वास्तुकार विद्याधर भट्टाचार्य थे।
सही कूट का चयन कीजिए:
सही उत्तर: (A)
व्याख्या: कथन 4 असत्य है। विजय स्तम्भ (चित्तौड़गढ़) का निर्माण राणा कुम्भा ने मालवा विजय के उपलक्ष्य में 1437 ई. में करवाया था, परन्तु इसके मुख्य वास्तुकार 'मण्डन' के निर्देशन में सूत्रधार 'जैता' (और उसके पुत्र नापा, पोमा, पूंजा) थे। विद्याधर भट्टाचार्य जयपुर नगर के वास्तुकार थे। कथन 1, 2 और 3 पूर्णतः सत्य हैं। सांभर झील जयपुर, नागौर, डीडवाना-कुचामन और अजमेर जिलों की सीमाओं से संबंध रखती है।
🏷️ [RPSC Archivist 2024] [RPSC Research Scholar 2024]
प्र. 8: निम्नलिखित ऐतिहासिक विवरण किस विशिष्ट व्यक्तित्व को इंगित करता है? • ये मारवाड़ के शासक महाराजा जसवंत सिंह के विश्वसनीय दीवान थे। • इन्होंने अपनी प्रसिद्ध ऐतिहासिक विगत में मारवाड़ राज्य के सात परगनों का विस्तृत प्रशासनिक एवं राजस्व विवरण प्रस्तुत किया है। • इनके द्वारा रचित ग्रंथ को 'मारवाड़ का गजेटियर' कहा जाता है, जिसमें प्रत्येक गांव के सामाजिक, धार्मिक और राजनीतिक इतिहास का प्रामाणिक ज्ञान होता है।
सही उत्तर: (B)
व्याख्या: यह विवरण मुहणौत नैणसी से संबंधित है। मुहणौत नैणसी जोधपुर के महाराजा जसवंत सिंह के दीवान थे। उनकी प्रसिद्ध कृति "मारवाड़ रा परगना री विगत" को मारवाड़ का गजेटियर कहा जाता है, जिसमें मारवाड़ के 7 परगनों का सटीक प्रशासनिक और भौगोलिक विवरण दर्ज है। मुंशी देवीप्रसाद ने इन्हें 'राजपूताने का अबुल फजल' कहा था।
प्र. 9: राजस्थान में राजनीतिक एवं सामाजिक जन-जागरण में महती भूमिका निभाने वाले समाचार पत्रों (सूची-I) का उनके संस्थापकों/संपादकों या विशिष्टताओं (सूची-II) के साथ सही मिलान कीजिए:
सूची-I (समाचार पत्र) (A) मजहरूल-सरूर (B) राजपुताना गजट (C) राजस्थान समाचार (D) त्याग भूमि
सूची-II (संस्थापक/संपादक/विशिष्टता) 1. मौलवी मुराद अली 2. मुंशी समर्थदान चारण 3. हरिभाऊ उपाध्याय 4. 1849 ई. में भरतपुर से प्रकाशित राजस्थान का प्रथम समाचार पत्र
सही कूट का चयन कीजिए:
सही उत्तर: (B)
व्याख्या: मजहरूल-सरूर (1849) भरतपुर से प्रकाशित होने वाला राजस्थान का प्रथम समाचार पत्र था जो हिंदी और उर्दू दोनों में छपता था। राजपुताना गजट के संपादक मौलवी मुराद अली थे। राजस्थान समाचार का प्रकाशन 1889 ई. में मुंशी समर्थदान चारण ने अजमेर से प्रारम्भ किया था। त्याग भूमि नामक मासिक पत्रिका के संपादक प्रसिद्ध राजनीतिज्ञ हरिभाऊ उपाध्याय थे।
🏷️ [RPSC Asst. Town Planner-2022] [RPSC Asst. Eng. Ground Water Dept. - 2023] [RPSC RAS/RTS Pre 2023] [RPSC Research Assistant 2016]
प्र. 10: नीचे दो कथन दिए गए हैं, एक को अभिकथन (A) और दूसरे को कारण (R) के रूप में दर्शाया गया है:
अभिकथन (A): राजस्थान के राजनैतिक एकीकरण की प्रक्रिया के प्रथम चरण में 18 मार्च 1948 को अलवर, भरतपुर, धौलपुर तथा करौली रियासतों को मिलाकर एक नए संघ का निर्माण किया गया। कारण (R): श्री के. एम. मुंशी के सुझाव पर इस नवगठित संघ का नाम 'मत्स्य संघ' रखा गया तथा बाद में 15 मई 1949 को शंकर राव देव समिति की सिफारिश पर इसका विलय वृहत्तर राजस्थान में कर दिया गया।
उपर्युक्त कथनों के संदर्भ में सही कूट का चयन कीजिए:
सही उत्तर: (B)
व्याख्या: यहाँ अभिकथन (A) पूर्णतः सत्य है कि 18 मार्च 1948 को चार रियासतों को मिलाकर प्रथम चरण पूर्ण हुआ। कारण (R) भी ऐतिहासिक तथ्यों (के.एम. मुंशी का सुझाव तथा शंकर राव देव समिति की सिफारिश पर 15 मई 1949 को विलय) के अनुसार पूर्णतः सत्य है। परन्तु कारण (R), अभिकथन (A) के घटित होने (अर्थात संघ निर्माण के मूल कारण) की व्याख्या नहीं करता, बल्कि उसके नामकरण और बाद के विलय की जानकारी देता है। अतः दोनों सत्य हैं किन्तु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है।
प्र. 11: 1857 की क्रांति के समय राजपूताना की विभिन्न रियासतों (सूची-I) का वहाँ नियुक्त ब्रिटिश पॉलिटिकल एजेंटों (सूची-II) के साथ सही मिलान कीजिए तथा नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर का चयन कीजिए:
व्याख्या: 1857 के विद्रोह के समय ए.जी.जी. जॉर्ज पैट्रिक लारेंस थे। विभिन्न रियासतों के पोलिटिकल एजेंट इस प्रकार थे: मेवाड़ के कैप्टन शॉवर्स, मारवाड़ के मैक मेसन (जिनका सिर आउवा में काटा गया), जयपुर के कर्नल ईडन, सिरोही के कैप्टन जे.डी. हॉल और भरतपुर के मेजर मॉरीसन थे।
🏷️ [RPSC Asst. Town Planner-2022] [RPSC RAS/RTS Pre 2023] [RPSC Sr. Teacher Gr.-II Sanskrit-2018 Group A] [RPSC School Lect. (Group-D) 2022]
प्र. 12: राजस्थान के एकीकरण के विभिन्न चरणों के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन सा कथन असत्य है?
सही उत्तर: (C)
व्याख्या: कथन (C) असत्य है। 18 अप्रैल 1948 को तृतीय चरण में गठित 'संयुक्त राजस्थान' (जिसमें उदयपुर का विलय हुआ था) का उद्घाटन पंडित जवाहरलाल नेहरू ने किया था। सरदार वल्लभभाई पटेल ने 30 मार्च 1949 को 'वृहद् राजस्थान' का उद्घाटन किया था। शेष सभी कथन ऐतिहासिक रूप से सत्य हैं।
🏷️ [RPSC ASO (Agri.) 2024] [RPSC Head Master Prav. (San. Edu) 2021 Paper-I] [RPSC RAS/RTS Pre 2013] [RPSC Stenographer 2011]
प्र. 13: राजस्थान के प्रमुख किसान आन्दोलनों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
I. 1897 ई. में प्रारम्भ हुए बिजोलिया किसान आन्दोलन का जनक साधु सीताराम दास को माना जाता है। II. बिजोलिया के राव कृष्ण सिंह ने 1903 ई. में 'चंवरी कर' (पुत्री के विवाह पर) तथा पृथ्वी सिंह ने 1906 ई. में 'तलवार बंधाई' कर लगाया था। III. विजय सिंह पथिक ने कानपुर से प्रकाशित होने वाले समाचार-पत्र 'प्रताप' (गणेश शंकर विद्यार्थी द्वारा सम्पादित) के माध्यम से बिजोलिया आन्दोलन को सम्पूर्ण भारत में लोकप्रिय बनाया। IV. 1921 में प्रारम्भ हुए बेगूँ किसान आन्दोलन का नेतृत्व रामनारायण चौधरी ने किया, जिसमें रूपाजी व कृपाजी धाकड़ शहीद हुए थे।
उपर्युक्त में से कौन से कथन पूर्णतः सत्य हैं?
सही उत्तर: (D)
व्याख्या: दिए गए चारों कथन पूर्णतः सत्य हैं। बिजोलिया आन्दोलन 1897 से 1941 तक चला, जिसके जनक साधु सीताराम दास थे और बाद में विजय सिंह पथिक ने नेतृत्व संभाला। पथिक जी ने 'प्रताप' अखबार से इसे राष्ट्रीय स्तर पर पहुँचाया। बेगूँ किसान आन्दोलन (1921) रामनारायण चौधरी के नेतृत्व में हुआ जहाँ ट्रेंच कमीशन की गोलाबारी में रूपाजी और कृपाजी धाकड़ शहीद हो गए थे।
प्र. 14: राजस्थान में राजनैतिक जन-जागरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले समाचार-पत्रों व उनके संस्थापकों/सम्पादकों का कौन सा युग्म सही सुमेलित नहीं है?
सही उत्तर: (D)
व्याख्या: विकल्प (D) सुमेलित नहीं है। 'अखण्ड भारत' समाचार पत्र का प्रकाशन 1936 ई. में जयनारायण व्यास द्वारा शुरू किया गया था। विजय सिंह पथिक का संबंध 'राजस्थान केसरी', 'नवीन राजस्थान' और 'तरुण राजस्थान' से था। शेष सभी युग्म सही सुमेलित हैं।
🏷️ [RPSC Evaluation Officer 2020] [RPSC Sr. Teacher Gr II S.E. (G-B) 2022 Re-Exam] [RPSC Research Assistant 2016] [RPSC Sr. Teacher Gr-II (SE) G-D 2022]
प्र. 15: देशी रियासतों में उत्तरदायी शासन की स्थापना हेतु गठित प्रजामण्डलों (नवीन राजस्थान परिप्रेक्ष्य 2026) के संदर्भ में कौन से युग्म (प्रजामण्डल, स्थापना वर्ष एवं संस्थापक) सही सुमेलित हैं?
1. बीकानेर प्रजामण्डल (1936) — मघाराम वैद्य एवं लक्ष्मणदास स्वामी (कलकत्ता में स्थापित) 2. मेवाड़ प्रजामण्डल (1938) — माणिक्यलाल वर्मा (अध्यक्ष - बलवंत सिंह मेहता) 3. जैसलमेर प्रजामण्डल (1945) — मीठालाल व्यास (जोधपुर में स्थापित) 4. किशनगढ़ प्रजामण्डल (1939) — कांतिलाल चौथाणी एवं जमालशाह
सही कूट का चयन कीजिए:
सही उत्तर: (D)
व्याख्या: दिए गए चारों युग्म पूर्णतः सही सुमेलित हैं। बीकानेर प्रजामण्डल 4 अक्टूबर 1936 को मघाराम वैद्य द्वारा कलकत्ता में स्थापित हुआ। मेवाड़ प्रजामण्डल 24 अप्रैल 1938 को माणिक्यलाल वर्मा द्वारा बना। जैसलमेर प्रजामण्डल 15 दिसम्बर 1945 को मीठालाल व्यास द्वारा जोधपुर में स्थापित किया गया। किशनगढ़ प्रजामण्डल 1939 में कांतिलाल चौथाणी और जमालशाह द्वारा स्थापित हुआ।
प्र. 16: राजस्थान की महत्वपूर्ण सामाजिक-राजनैतिक संस्थाओं (सूची-I) का उनके संस्थापकों/संस्थापना की विशिष्टताओं (सूची-II) के साथ सही मिलान कीजिए:
सूची-I (संस्था) (A) राजस्थान सेवा संघ (1919) (B) देश हितैषिणी सभा (1877) (C) वीर भारत सभा (1910) (D) राजपूताना मध्य भारत सभा (1918)
सूची-II (संस्थापक/विशिष्टता) 1. केसरी सिंह बारहठ (अजमेर/कोटा क्षेत्र में क्रान्तिकारी संगठन) 2. जमनालाल बजाज के प्रयासों से दिल्ली के चाँदनी चौक (मारवाड़ी पुस्तकालय) में प्रथम अधिवेशन 3. विजय सिंह पथिक, रामनारायण चौधरी व हरिभाई किंकर (वर्धा में स्थापित) 4. महाराणा सज्जन सिंह की अध्यक्षता में उदयपुर में स्थापित (विवाह सम्बन्धी कठिनाइयों हेतु)
कूट:
सही उत्तर: (A)
व्याख्या: (A) राजस्थान सेवा संघ 1919 में वर्धा में विजय सिंह पथिक आदि द्वारा बना (1920 में अजमेर स्थानांतरित)। (B) देश हितैषिणी सभा 2 जुलाई 1877 को उदयपुर में महाराणा सज्जन सिंह द्वारा बनी। (C) वीर भारत सभा 1910 में केसरी सिंह बारहठ द्वारा स्थापित गुप्त क्रान्तिकारी संस्था थी। (D) राजपूताना मध्य भारत सभा 1918 में जमनालाल बजाज के प्रयासों से दिल्ली में बनी।
🏷️ [RPSC Sub Inspector 2021] [RPSC RAS/RTS Pre 2012] [RPSC Sr. Teacher Gr-II 31/10/2018] [RPSC Research Scholar 2024]
प्र. 17: मारवाड़ (जोधपुर) राजवंश के प्रतापी शासकों के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन सा कथन असत्य है?
सही उत्तर: (C)
व्याख्या: कथन (C) असत्य है। राव चन्द्रसेन को महाराणा प्रताप का पथ-प्रदर्शक (अग्रगामी) और 'मारवाड़ का भूला-बिसरा राजा' कहा जाता है क्योंकि उन्होंने जीवन भर मुगलों (अकबर) से संघर्ष किया और कभी मुगलों की अधीनता स्वीकार नहीं की। उन्होंने कभी वैवाहिक संबंध नहीं बनाये। अन्य सभी कथन ऐतिहासिक सत्य हैं।
🏷️ [RPSC Protection Officer-2022] [RPSC Sub Inspector 2021] [RPSC RAS/RTS Pre 2013]
प्र. 18: राजस्थान के इतिहास में निर्णायक भूमिका निभाने वाले निम्नलिखित ऐतिहासिक युद्धों को उनके घटित होने के सही कालक्रमानुसार (पहले से बाद के क्रम में) व्यवस्थित कीजिए:
1. भटनेर का युद्ध (तैमूर लंग का आक्रमण) 2. सारंगपुर का युद्ध (मेवाड़-मालवा संघर्ष) 3. गागरोन का युद्ध 4. दत्ताणी का युद्ध
सही कूट का चयन कीजिए:
सही उत्तर: (B)
व्याख्या: सही कालक्रम इस प्रकार है: 1. भटनेर का युद्ध (1398 ई.) - भाटी राजा केलण और तैमूर लंग के मध्य। 2. सारंगपुर का युद्ध (1437 ई.) - राणा कुम्भा और महमूद खिलजी प्रथम के मध्य। 3. गागरोन का युद्ध (1519 ई.) - राणा सांगा और मालवा के महमूद खिलजी द्वितीय के मध्य। 4. दत्ताणी का युद्ध (1583 ई.) - राव सुरताण और मुगलों के मध्य।
🏷️ [RPSC RAS/RTS Pre 2023] [RPSC School Lect. (G-E) 2022] [RPSC Sr. Teacher Gr II (SE) Group-C 2022] [RPSC A.P. Lib. PTI (CE) 2023]
प्र. 19: नीचे दो कथन दिए गए हैं, एक को अभिकथन (A) और दूसरे को कारण (R) के रूप में दर्शाया गया है:
अभिकथन (A): रणथम्भौर के प्रतापी चौहान शासक हम्मीर देव चौहान को 1301 ई. में अलाउद्दीन खिलजी के भीषण आक्रमण का सामना करना पड़ा, जिसमें उनका पतन हो गया। कारण (R): हम्मीर देव ने शरणागत वत्सलता धर्म निभाते हुए अलाउद्दीन खिलजी के विद्रोही मंगोल नेता मुहम्मद शाह को शरण दी थी, तथा अंतिम समय में हम्मीर के मंत्री रणमल और रतिपाल ने खिलजी के साथ गद्दारी कर दुर्ग के गुप्त मार्ग बता दिए थे।
उपर्युक्त कथनों के संदर्भ में सही कूट का चयन कीजिए:
सही उत्तर: (A)
व्याख्या: अभिकथन और कारण दोनों सत्य हैं। हम्मीर देव चौहान 'हठ' और 'शरणागत वत्सलता' के लिए प्रसिद्ध थे। उन्होंने विद्रोही मंगोल नेता मुहम्मद शाह और केहब्रू को शरण दी थी, जो खिलजी के आक्रमण (1301 ई.) का मूल कारण बना। 1301 में हम्मीर के सेनापति रणमल और रतिपाल के विश्वासघात के कारण दुर्ग का पतन हुआ। अतः कारण अभिकथन की पूर्ण व्याख्या करता है।
प्र. 20: 1857 की क्रांति और राजपूताना की रियासतों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राजपूताना में 1857 की क्रांति का प्रारंभ 28 मई 1857 को नसीराबाद छावनी की 15वीं बंगाल नेटिव इन्फेंट्री के सैनिकों के विद्रोह से हुआ था। 2. आउवा के ठाकुर खुशाल सिंह चम्पावत ने जोधपुर लीजियन के सैनिकों का नेतृत्व किया तथा जोधपुर के पॉलिटिकल एजेंट मॉक मेसन का सिर काटकर आउवा के किले पर लटका दिया। 3. कोटा में जन-विद्रोह का नेतृत्व लाला जयदयाल और मेहराब खान ने किया, जहाँ पॉलिटिकल एजेंट मेजर बर्टन की हत्या कर दी गई थी जिसे बाद में मेजर जनरल रॉबर्ट्स ने दबाया। 4. बीकानेर के महाराजा सरदार सिंह ने 1857 के विद्रोहियों के दमन हेतु अपनी राज्य सीमा से बाहर जाकर भी अंग्रेजों की सक्रिय सैन्य सहायता की थी।
उपर्युक्त में से कौन से कथन सही हैं?
सही उत्तर: (D)
व्याख्या: दिए गए चारों कथन 1857 की क्रांति के संदर्भ में पूर्णतः सत्य हैं। नसीराबाद से 28 मई 1857 को बिगुल बजा। आउवा में ठाकुर खुशाल सिंह ने मॉक मेसन का सिर काटा। कोटा में 15 अक्टूबर 1857 को मेहराब खान व जयदयाल के नेतृत्व में बर्टन की हत्या हुई और रॉबर्ट्स ने दमन किया। बीकानेर के सरदार सिंह एकमात्र ऐसे शासक थे जो अपनी रियासत से बाहर जाकर अंग्रेजों की सहायता किए।
🏷️ [RPSC Sr. Teacher Sanskrit-2022 Group A] [RPSC RAS/RTS Pre 2006-07] [RPSC Sr. Teacher Gr-II (G-I) 2016] [RPSC ACF 2011]
प्र. 21: राजस्थान में आदिवासी व सामाजिक जन-जागरण के प्रणेताओं और उनकी संस्थाओं/आन्दोलनों के संदर्भ में कौन से कथन सही सम्मिलित हैं?
1. गोविन्द गुरु ने भीलों में सामाजिक चेतना व कुरीतियों को मिटाने हेतु 1883 ई. में 'सम्प सभा' की स्थापना की। 2. मोतीलाल तेजावत ने 1921 में 'एकी आन्दोलन' (भौमट भील आन्दोलन) की शुरुआत की, जिसका उद्देश्य भारी लगान और बेगार से मुक्ति था। 3. 'वागड़ के गाँधी' नाम से प्रसिद्ध भोगीलाल पाण्ड्या ने डूंगरपुर में हरिजन सेवा समिति व वागड़ सेवा मन्दिर की स्थापना की। 4. 1947 में डूंगरपुर के रास्तापाल गाँव में अपने शिक्षक सेंगाभाई को बचाने के प्रयास में भील वीरबाला कालीबाई शहीद हो गईं।
सही कूट का चयन कीजिए:
सही उत्तर: (D)
व्याख्या: दिए गए सभी कथन सत्य हैं। गोविन्द गुरु ने 1883 में सम्प सभा की स्थापना कर 'भगत पंथ' चलाया। मोतीलाल तेजावत (बावजी) ने 1921 में मातृकुण्डिया से एकी आन्दोलन चलाया। भोगीलाल पाण्ड्या वागड़ के गांधी कहलाते हैं जिन्होंने सामाजिक उत्थान के कार्य किये। 1947 में रास्तापाल (डूंगरपुर) में कालीबाई अपने गुरु को बचाते हुए शहीद हुईं।
🏷️ [RPSC RAS/RTS Pre 2006-07] [RPSC RAS/RTS Pre 1997-98] [RPSC Sr. Teacher Gr-II (G-I) 2016] [RPSC Sub Inspector 2021]
प्र. 22: राजस्थान के ऐतिहासिक व साहित्यिक महत्व के ग्रंथों (सूची-I) का उनके रचयिताओं (सूची-II) के साथ सही मिलान कीजिए:
व्याख्या: 'बीकानेर के राठौरां री ख्यात' बीकानेर के महाराजा रतन सिंह के दरबारी कवि दयालदास की रचना है। 'पृथ्वीराज रासो' हिंदी का प्रथम महाकाव्य है जिसे चंदबरदाई ने लिखा। 'ललित-विग्रहराज' विग्रहराज चतुर्थ के दरबारी विद्वान सोमदेव ने लिखा। 'चेतावनी रा चुंगटिया' 13 सोरठों की वह राजस्थानी रचना है जिसे पढ़कर मेवाड़ के महाराणा फतह सिंह 1903 के दिल्ली दरबार में शामिल नहीं हुए, इसे केसरी सिंह बारहठ ने लिखा था।
🏷️ [RPSC Assistant Archivist 2024] [RPSC Research Scholar 2024] [RPSC RAS/RTS Pre 2016] [RPSC Archivist 2024]
प्र. 23: मध्यकालीन और आधुनिक राजपूताना में अभिलेखागारीय स्रोतों के संदर्भ में नीचे दिया गया विवरण किस विशिष्ट अभिलेख (बही) शृंखला को इंगित करता है?
• यह मारवाड़ रियासत की एक प्रसिद्ध प्रशासनिक अभिलेख शृंखला है। • इसमें राज्य के कर्मचारियों, उनके पदों, नियुक्तियों और प्रशासनिक जिम्मेदारियों का विस्तृत रिकॉर्ड रखा जाता था। • इसके साथ ही 'हकीकत बही' (दैनिक राजकीय घटनाक्रम व राजस्व) व 'खरीता बही' (पत्राचार व व्यापारिक लेन-देन) भी इसी रियासत की प्रशासनिक व्यवस्था का अभिन्न हिस्सा थीं।
सही उत्तर: (C)
व्याख्या: यह विवरण मारवाड़ रियासत की 'ओहदा बही' का है, जिसमें कर्मचारियों के पदों (ओहदों) का विस्तृत ब्यौरा होता था। 'अड़सट्टा' जयपुर राज्य का भूमि सम्बन्धी रिकॉर्ड है। 'कागद बही' बीकानेर राज्य के व्यापारिक और वाणिज्यिक करों का रिकॉर्ड है। 'बाजे-तालिके' किशनगढ़ रियासत के अभिलेखों की शृंखला है।
🏷️ [RPSC Sr. Teacher Sanskrit-2022 Group A] [RPSC Sub Inspector 14/09/2021] [RPSC RAS/RTS Pre 2009] [RPSC Sr. Teacher Gr-II 2011]
प्र. 24: राजस्थान की महत्वपूर्ण ऐतिहासिक इमारतों/दुर्गों एवं उनके निर्माताओं अथवा विशिष्टताओं के संदर्भ में कौन सा युग्म सुमेलित नहीं है?
सही उत्तर: (D)
व्याख्या: विकल्प (D) सुमेलित नहीं है। 9 मंजिला विजय स्तम्भ (चित्तौड़गढ़) का निर्माण 1437 ई. के सारंगपुर युद्ध में मालवा के सुल्तान महमूद खिलजी 'प्रथम' पर विजय के उपलक्ष्य में 'महाराणा कुम्भा' ने करवाया था, ना कि महाराणा सांगा ने। शेष सभी विकल्प पूर्णतः सत्य और ऐतिहासिक रूप से सुमेलित हैं।
🏷️ [RPSC Sr. Teacher Gr-II (G-I) 2016] [RPSC Deputy Commandant 2020] [RPSC Sr. Teacher Gr II S.E. (TSP) - 2018]
प्र. 25: ब्रिटिश और रियासती शासन के दौरान किसानों व जनजातियों पर हुए भीषण अत्याचारों व नरसंहारों (काण्ड) की निम्नलिखित घटनाओं को उनके घटित होने के सही कालक्रमानुसार (प्राचीन से नवीन क्रम में) व्यवस्थित कीजिए:
1. मानगढ़ पहाड़ी हत्याकाण्ड (गोविन्द गुरु के अनुयायियों पर) 2. नीमूचाणा हत्याकाण्ड (अलवर किसान आन्दोलन) 3. चण्डावल काण्ड (मारवाड़) 4. डाबड़ा काण्ड (डीडवाना, नागौर)
सही कूट का चयन कीजिए:
सही उत्तर: (A)
व्याख्या: इन नरसंहारों का सही कालक्रम इस प्रकार है: 1. मानगढ़ पहाड़ी हत्याकाण्ड - 17 नवंबर 1913 (भील आदिवासियों का नरसंहार)। 2. नीमूचाणा काण्ड - 14 मई 1925 (महात्मा गांधी ने इसे जलियांवाला बाग से भी वीभत्स बताया)। 3. चण्डावल काण्ड - 28 मार्च 1942 (मारवाड़ में)। 4. डाबड़ा काण्ड - 13 मार्च 1947 (नागौर के डीडवाना में, जहाँ 5 किसान शहीद हुए)।
🏷️ [RPSC RAS/RTS Pre 2006-07] [RPSC Research Scholar 2024] [RPSC Senior Physical Edu.-2022 Paper-I] [RPSC Asst. Town Planner-2022]
प्र. 26: मई 2026 के अद्यतन ऐतिहासिक विश्लेषण एवं ब्रिटिश संधियों व 1857 की क्रांति के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
I. 1817-18 ई. की संधियों के तहत राजपूताना में सर्वप्रथम नवम्बर 1817 में करौली के शासक हरवक्षपाल सिंह ने अंग्रेजों से संधि की, जबकि सिरोही ने अंतिम रूप से 1823 ई. में चार्ल्स मेटकाफ के साथ संधि सम्पन्न की। II. 1857 के विप्लव के समय टोंक का नवाब वजीरुद्दौला था, जहाँ की विद्रोही सेना का नेतृत्व मीर आलम खान ने किया। III. आउवा के ठाकुर कुशाल सिंह (जिन्होंने मैक मेसन का सिर काटा था) ने अपना अंतिम समय कोठारिया में नहीं, बल्कि मेवाड़ (उदयपुर) में व्यतीत किया था, जहाँ 1864 ई. में उनका देहांत हुआ। IV. 1857 के विद्रोह के दौरान 'म्युटिनीज इन राजपूताना' (Mutinies in Rajputana) पुस्तक आई. टी. प्रिचर्ड द्वारा लिखी गई, जिसमें उनके व्यक्तिगत स्मरण वर्णित हैं।
उपर्युक्त में से कौन से कथन सही हैं?
सही उत्तर: (D)
व्याख्या: दिए गए चारों कथन पूर्णतः सत्य हैं। अंग्रेजों से संधि करने वाला प्रथम राज्य करौली (15 नवम्बर 1817) तथा अंतिम सिरोही (1823) था। टोंक नवाब वजीरुद्दौला के समय विद्रोही सेना का नेतृत्व मीर आलम खान ने किया। आउवा के ठाकुर कुशाल सिंह ने शरण कोठारिया में ली थी, परन्तु अपना अंतिम समय उदयपुर में बिताया और वहीं 1864 में उनका निधन हुआ। 'म्युटिनीज इन राजपूताना' आई.टी. प्रिचर्ड की प्रामाणिक रचना है।
🏷️ [RPSC RAS/RTS Pre 2006-07] [RPSC RAS/RTS Pre Re-Exam 1999-2000] [RPSC Archivist 2024]
प्र. 27: राजस्थान के प्रमुख ऐतिहासिक ग्रन्थों व उनकी विषयवस्तु/रचयिताओं के संदर्भ में कौन सा युग्म सही सुमेलित नहीं है?
सही उत्तर: (D)
व्याख्या: विकल्प (D) सुमेलित नहीं है। सवाई जयसिंह द्वारा 1733 ई. में रचित 'जीज मुहम्मदशाही' कृषि या भू-राजस्व से संबंधित नहीं है, बल्कि यह 'नक्षत्रों (खगोलशास्त्र)' संबंधी ज्ञान से संबंधित सारणियों का एक सेट है। 'अड़सट्टा' जयपुर राज्य का भूमि व भू-राजस्व रिकॉर्ड होता था। अन्य सभी विकल्प (A, B, और C) ऐतिहासिक रूप से पूर्णतः सुमेलित हैं।
प्र. 28: मई 2026 के नवीनतम अद्यतन के अनुसार प्रजामण्डल आन्दोलनों के संस्थापक एवं स्थापना स्थल/वर्ष से संबंधित कौन से समूह सत्य हैं?
1. जैसलमेर प्रजामण्डल (1945) — मीठालाल व्यास द्वारा इसका गठन जैसलमेर से बाहर 'जोधपुर' में किया गया था। 2. बीकानेर प्रजामण्डल (1936) — मघाराम वैद्य द्वारा इसका गठन रियासत से बाहर 'कलकत्ता' में किया गया था। 3. किशनगढ़ प्रजामण्डल (1939) — कान्तिचन्द्र चौथाणी व जमालशाह के प्रयासों से स्थापित हुआ। 4. सिरोही राज्य प्रजामण्डल (1939) — 'राजस्थान के गांधी' गोकुलभाई भट्ट द्वारा इसकी स्थापना की गई।
सही कूट का चयन कीजिए:
सही उत्तर: (D)
व्याख्या: दिए गए चारों समूह पूर्णतः सत्य हैं। जैसलमेर प्रजामण्डल की स्थापना 15 दिसम्बर 1945 को मीठालाल व्यास ने जोधपुर में की। बीकानेर प्रजामण्डल 4 अक्टूबर 1936 को मघाराम वैद्य द्वारा कलकत्ता में स्थापित हुआ। किशनगढ़ प्रजामण्डल 1939 में कान्तिचन्द्र चौथाणी और जमालशाह द्वारा बनाया गया। सिरोही प्रजामण्डल की स्थापना 23 जनवरी 1939 को गोकुलभाई भट्ट ने की थी।
🏷️ [RPSC Sr. Teacher Gr II S.E. (G-B) 2022 Re-Exam]
प्र. 29: अलाउद्दीन खिलजी की राजपूताना में साम्राज्यवादी विस्तार की निम्नलिखित प्रमुख विजयों को उनके घटित होने के सही कालक्रमानुसार (पहले से बाद के क्रम में) व्यवस्थित कीजिए:
1. चित्तौड़ विजय 2. रणथम्भौर विजय 3. जालौर विजय 4. सिवाना विजय
सही कूट का चयन कीजिए:
सही उत्तर: (A)
व्याख्या: अलाउद्दीन खिलजी के राजपूताना अभियानों का सही कालक्रम इस प्रकार है: सर्वप्रथम रणथम्भौर विजय (1301 ई.) जिसमें हम्मीर देव वीरगति को प्राप्त हुए। इसके बाद चित्तौड़ विजय (1303 ई.) राणा रतन सिंह के विरुद्ध। फिर सिवाना विजय (1308 ई.) शीतलदेव के विरुद्ध। अंत में जालौर विजय (1311 ई.) कान्हड़देव के विरुद्ध। अतः सही क्रम 2, 1, 4, 3 है।
प्र. 30: नीचे दो कथन दिए गए हैं, एक को अभिकथन (A) और दूसरे को कारण (R) के रूप में दर्शाया गया है:
अभिकथन (A): मेवाड़ रियासत के बिजौलिया ठिकाने में 1897 ई. से शुरू हुआ किसान आन्दोलन वस्तुतः जागीरदारों द्वारा लगाए गए अत्यधिक और अनुचित करों का परिणाम था। कारण (R): 1903 ई. में राव कृष्ण सिंह ने पुत्री के विवाह पर 5 रुपये का 'चंवरी कर' लगाया और 1906 ई. में नए जागीरदार पृथ्वी सिंह ने किसानों पर 'तलवार बंधाई' (उत्तराधिकार शुल्क) कर का भार डाल दिया, जिसके विरोध में किसानों ने हल नहीं चलाया।
उपर्युक्त कथनों के संदर्भ में सही कूट का चयन कीजिए:
सही उत्तर: (A)
व्याख्या: अभिकथन और कारण दोनों पूर्णतः सत्य हैं। बिजौलिया आन्दोलन (1897-1941) 44 वर्षों तक चला अहिंसक आन्दोलन था। जागीरदार राव कृष्ण सिंह ने 1903 में चंवरी कर (लड़की की शादी पर) लगाया और 1906 में पृथ्वी सिंह ने जागीरदारी उत्तराधिकार शुल्क (तलवार बंधाई) का आर्थिक भार किसानों पर थोप दिया। इन्ही शोषणकारी नीतियों (कारण R) ने किसानों को आन्दोलन (अभिकथन A) के लिए बाध्य किया, अतः (R), (A) की सही व्याख्या करता है।
🏷️ [RPSC RAS/RTS Pre 2023] [RPSC RAS/RTS Pre 2015] [RPSC School Lect. (SE) G-B 2022]
प्र. 31: चौहान वंश के ऐतिहासिक वैभव के संदर्भ में नीचे दिया गया विवरण किस विशिष्ट शासक को इंगित करता है?
• यह अजमेर के चौहान वंश का सबसे प्रतापी और विद्यानुरागी शासक था जिसे 'कवि बान्धव' भी कहा जाता था। • इसने तोमर शासक तंवर को पराजित करके दिल्ली (ढिल्लिका) पर चौहानों की सत्ता स्थापित की थी। • इसके शासनकाल में 'दिल्ली शिवालिक स्तम्भ अभिलेख' उत्कीर्ण करवाया गया। • इसके द्वारा अजमेर में निर्मित संस्कृत पाठशाला को ही कुतुबुद्दीन ऐबक ने तुड़वाकर 'अढ़ाई दिन का झोंपड़ा' मस्जिद में बदल दिया था।
सही उत्तर: (C)
व्याख्या: उपर्युक्त सभी तथ्य विग्रहराज चतुर्थ (बीसलदेव) से संबंधित हैं। 1153 से 1163 ई. तक इनका शासनकाल रहा, जिसे चौहानों का स्वर्ण काल माना जाता है। इन्होने दिल्ली पर अधिकार किया, शिवालिक स्तम्भ लेख लिखवाया और अजमेर में संस्कृत कंठाभरण पाठशाला बनवाई थी, जिसे बाद में ऐबक ने 'अढ़ाई दिन का झोंपड़ा' बना दिया।
प्र. 32: राजपूताना की विभिन्न रियासतों में प्रचलित प्राचीन अभिलेखीय रिकॉर्ड/बहियों (सूची-I) का उनकी विषयवस्तु एवं संबंधित रियासत (सूची-II) के साथ सही मिलान कीजिए:
सूची-II (विषयवस्तु/रियासत) 1. बीकानेर राज्य के व्यापारिक मार्गों व वाणिज्यिक करों की प्रामाणिक सूचना 2. किशनगढ़ रियासत की प्रशासनिक एवं कर व्यवस्था का रिकॉर्ड 3. जयपुर राज्य का भूमि व भू-राजस्व संबंधी विस्तृत रिकॉर्ड 4. मारवाड़ रियासत की दैनिक राजकीय गतिविधियों व राजस्व का लेखा-जोखा
कूट:
सही उत्तर: (A)
व्याख्या: 'कागद बही' में बीकानेर राज्य के व्यापारिक और वाणिज्यिक करों का रिकॉर्ड दर्ज था। 'बाजे-तालिके' किशनगढ़ रियासत के भूमि और प्रशासनिक रिकॉर्ड की शृंखला थी। 'अड़सट्टा' जयपुर रियासत का भूमि और भू-राजस्व संबंधी प्रमुख रिकॉर्ड था। 'हकीकत बही' मारवाड़ (जोधपुर) रियासत की दैनिक घटनाओं और राजस्व से संबंधित महत्वपूर्ण बही थी।
🏷️ [RPSC Asst. Agri. Officer 2018 Paper-I] [RPSC Testing Officer 2021] [RPSC Research Assistant 2016] [RPSC RAS/RTS Pre 2009]
प्र. 33: बीकानेर रियासत के प्रतापी शासकों व उनके ऐतिहासिक योगदानों के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन सा कथन असत्य है?
सही उत्तर: (D)
व्याख्या: कथन (D) असत्य है। 1857 के विद्रोह के समय बीकानेर के महाराजा सरदार सिंह राजपूताना के एकमात्र ऐसे शासक थे जो अपनी रियासत से बाहर जाकर (हिसार, पंजाब तक) अपनी सेना के साथ अंग्रेजों की सक्रिय सहायता के लिए गए थे। उन्होंने तटस्थता की नीति नहीं अपनाई थी। अन्य सभी कथन महाराजा गंगा सिंह और सादुल सिंह के संदर्भ में पूर्णतः सत्य हैं।
🏷️ [RPSC Asst. Agri. Officer 2015 Paper-I] [RPSC Head Master Prav. (San. Edu) 2021 Paper-I] [RPSC School Lect. (Group-D) 2022] [RPSC RAS/RTS Pre 1996]
प्र. 34: राजस्थान में राष्ट्रीय चेतना जागृत करने वाले प्रमुख व्यक्तित्वों और उनके द्वारा स्थापित संस्थाओं/योगदानों का कौन सा समूह पूर्णतः सत्य है?
1. श्यामजी कृष्ण वर्मा — अजमेर में वकालत की, अजमेर म्यूनिसिपल कमिटी के प्रथम निर्वाचित भारतीय अध्यक्ष बने तथा ब्यावर में 'कृष्णा कॉटन मिल' की स्थापना में सहयोग दिया। 2. स्वामी गोपाल दास — 1907 ई. में चूरू में 'सर्व हितकारिणी सभा' की स्थापना कर जन जागृति लाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई। 3. विजय सिंह पथिक — बिजौलिया आन्दोलन को राष्ट्रव्यापी बनाया तथा 'वीर भारत समाज' एवं 'राजस्थान सेवा संघ' की स्थापना में सक्रिय नेतृत्व प्रदान किया। 4. भोगीलाल पाण्ड्या — आदिवासियों व दलितों के उत्थान हेतु 1935 ई. में डूंगरपुर में 'हरिजन सेवा समिति' की स्थापना की।
सही कूट का चयन कीजिए:
सही उत्तर: (D)
व्याख्या: दिए गए चारों समूह ऐतिहासिक तथ्यों के आधार पर पूर्णतः सत्य हैं। श्यामजी कृष्ण वर्मा ने अजमेर और ब्यावर में उल्लेखनीय कार्य किए। चूरू की 'सर्व हितकारिणी सभा' (1907) स्वामी गोपाल दास की देन थी। विजय सिंह पथिक ने 'वीर भारत समाज' और 'राजस्थान सेवा संघ' की स्थापना की। 'वागड़ के गांधी' भोगीलाल पाण्ड्या ने 1935 में डूंगरपुर में 'हरिजन सेवा समिति' बनाई थी।
प्र. 35: नीचे दो कथन दिए गए हैं, एक को अभिकथन (A) और दूसरे को कारण (R) के रूप में दर्शाया गया है:
अभिकथन (A): 1517 ई. के खातौली (वर्तमान कोटा/बूंदी सीमा) युद्ध में मेवाड़ के महाराणा सांगा ने दिल्ली सल्तनत के सुल्तान इब्राहिम लोदी को करारी शिकस्त दी थी। कारण (R): इस पराजय का प्रतिशोध लेने के लिए इब्राहिम लोदी ने 1519 ई. के गागरोन युद्ध में मालवा के महमूद खिलजी द्वितीय के साथ मिलकर राणा सांगा को पराजित किया।
उपर्युक्त कथनों के संदर्भ में सही कूट का चयन कीजिए:
सही उत्तर: (C)
व्याख्या: अभिकथन (A) पूर्णतः सत्य है; खातौली (1517 ई.) के युद्ध में राणा सांगा ने इब्राहिम लोदी को हराया था। परन्तु कारण (R) पूर्णतः असत्य है क्योंकि 1519 ई. के गागरोन युद्ध में इब्राहिम लोदी का कोई संबंध नहीं था; यह युद्ध राणा सांगा और मालवा के सुल्तान महमूद खिलजी द्वितीय के मध्य हुआ था, जिसमें भी 'राणा सांगा' की ही विजय हुई थी। अतः केवल (A) सत्य है।
🏷️ [RPSC Food Safety Officer - 2022] [RPSC School Lect. (S.E.)2020] [RPSC Research Scholar 2024]
प्र. 36: 1932 ई. के चर्चित 'बीकानेर राजद्रोह एवं षड्यंत्र मामले' के संदर्भ में (मई 2026 के अद्यतन परिप्रेक्ष्य अनुसार) निम्नलिखित में से किस पुस्तिका/पर्चे का वितरण कर महाराजा गंगा सिंह की दमनकारी नीतियों की पोल द्वितीय गोलमेज सम्मेलन (लंदन) के दौरान खोली गई थी, जिसमें स्वामी गोपालदास, सत्यनारायण सर्राफ और खूबचंद सर्राफ को मुख्य आरोपी बनाया गया था?
सही उत्तर: (B)
व्याख्या: बीकानेर षड्यंत्र केस 1932 में महाराजा गंगा सिंह के शासनकाल में घटित हुआ था। जब महाराजा गंगा सिंह गोलमेज सम्मेलन में लंदन गए थे, तब उनके पीछे 'बीकानेर एक दिग्दर्शन' नाम से पर्चे बांटे गए, जिसमें रियासत की दमनकारी नीतियों की कड़ी आलोचना की गई थी। इस मामले में स्वामी गोपालदास, सत्यनारायण सर्राफ, चंदनमल और खूबचंद सर्राफ आदि को राजद्रोह के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।
प्र. 37: राजस्थान में राजनीतिक जन-जागरण का माध्यम रहे प्रमुख समाचार-पत्रों व उनके संस्थापकों/प्रकाशन वर्षों का कौन सा युग्म सुमेलित नहीं है?
सही उत्तर: (D)
व्याख्या: विकल्प (D) सुमेलित नहीं है। 'राजपुताना गजट' के संपादक मौलवी मुराद अली थे। जयनारायण व्यास का संबंध 'अखण्ड भारत' (1936), 'आगीवाण' (राजस्थानी भाषा का प्रथम पत्र) और 'पीप' (अंग्रेजी) से था। अन्य सभी विकल्प (राजस्थान समाचार - मुंशी समर्थदान, त्याग भूमि - हरिभाऊ उपाध्याय, लोकवाणी - देवीशंकर तिवारी) पूर्णतः सुमेलित हैं।
🏷️ [RPSC Sub Inspector 2021] [RPSC RAS/RTS Pre 2013] [RPSC Asst. Agri. Officer 2015 Paper-I]
प्र. 38: राजपूताना के इतिहास को दिशा देने वाले निम्नलिखित महत्त्वपूर्ण युद्धों (सूची-I) का उनके घटित होने के वर्ष (सूची-II) के साथ सही मिलान कीजिए:
सूची-I (युद्ध) (A) भटनेर का युद्ध (तैमूर लंग का आक्रमण) (B) सारंगपुर का युद्ध (राणा कुम्भा व महमूद खिलजी प्रथम) (C) गागरोन का युद्ध (राणा सांगा व महमूद खिलजी द्वितीय) (D) गिरी-सुमेल का युद्ध (शेरशाह सूरी व मालदेव)
सूची-II (वर्ष) 1. 1544 ई. 2. 1519 ई. 3. 1437 ई. 4. 1398 ई.
कूट:
सही उत्तर: (A)
व्याख्या: भटनेर (वर्तमान हनुमानगढ़) का युद्ध 1398 ई. में भाटी शासक केलण और तैमूर लंग के मध्य हुआ। सारंगपुर का युद्ध 1437 ई. में मेवाड़-मालवा संघर्ष के तहत लड़ा गया। गागरोन का युद्ध 1519 ई. में लड़ा गया। गिरी-सुमेल का युद्ध 5 जनवरी 1544 ई. को शेरशाह सूरी और मारवाड़ के राव मालदेव के वीर सेनापतियों (जैता और कुम्पा) के मध्य लड़ा गया था।
🏷️ [RPSC RAS/RTS Pre 2018] [RPSC RAS/RTS Pre 2016] [RPSC RAS/RTS Pre 2008]
प्र. 39: पूर्व मध्यकालीन एवं मध्यकालीन राजस्थान की प्रशासनिक तथा राजस्व व्यवस्था के संदर्भ में प्रयुक्त होने वाली शब्दावलियों के संबंध में कौन सा कथन असत्य है?
सही उत्तर: (C)
व्याख्या: कथन (C) असत्य है। मध्यकालीन इतिहास में 'धावड़िया' उन व्यक्तियों को कहा जाता था जो कारवां व काफिले को लूटने का कार्य करते थे (डकैत/लुटेरे)। जबकि शासक के बाद सर्वोच्च प्रशासनिक अधिकारी 'प्रधान' या 'दीवान' कहलाता था। 'नैमित्तिक' (राजकीय ज्योतिष), 'पट्टा रेख' (आकलित राजस्व) और 'महकमा बकायत' (बकाया राजस्व वसूली विभाग) से संबंधित सभी कथन पूर्णतः सत्य हैं।
🏷️ [RPSC Asst. Town Planner-2022] [RPSC Garden Superintendent 2021] [RPSC School Lect. (Group-D) 2022] [RPSC RAS/RTS Pre 2009]
प्र. 40: राजस्थान की राजधानी चयन तथा राज्य के एकीकरण से जुड़ी समितियों व उनके निर्णयों के संदर्भ में (वर्तमान परिप्रेक्ष्य मई 2026 अनुसार) कौन से कथन सत्य हैं?
1. पी. सत्यनारायण राव समिति — इस समिति ने अपनी रिपोर्ट में जयपुर को वृहद् राजस्थान की राजधानी बनाए जाने की सिफारिश की थी। 2. शंकर राव देव समिति — इस समिति का गठन धौलपुर एवं भरतपुर राज्यों की जनता की राय जानने के लिए किया गया था कि वे राजस्थान में मिलना चाहते हैं या उत्तर प्रदेश में। 3. फजल अली आयोग (राज्य पुनर्गठन आयोग) — इसी आयोग की सिफारिश पर 1 नवम्बर 1956 को अजमेर-मेरवाड़ा और आबू-दिलवाड़ा का राजस्थान में पूर्ण विलय हुआ। 4. शंकर राव देव समिति की सिफारिश पर ही 15 मई 1949 को 'मत्स्य संघ' का विलय वृहत्तर राजस्थान में कर दिया गया।
सही कूट का चयन कीजिए:
सही उत्तर: (D)
व्याख्या: दिए गए चारों कथन पूर्णतः सत्य हैं। 27 मार्च 1949 को पी. सत्यनारायण राव समिति की सिफारिश पर ही जयपुर को राजधानी बनाया गया। डॉ. शंकर राव देव समिति (सदस्य: प्रभुदयाल व आर.के. सिद्धवा) ने भरतपुर-धौलपुर की भाषाई जनता की राय जानी और इसी के आधार पर 15 मई 1949 को मत्स्य संघ का विलय हुआ। 1 नवम्बर 1956 को फजल अली आयोग की रिपोर्ट के बाद अजमेर-मेरवाड़ा (जो उस समय भाग-सी का राज्य था) राजस्थान का हिस्सा बना।
प्र. 41: राजस्थान (मई 2026 के अद्यतन 41 जिलों के परिप्रेक्ष्य में) की विभिन्न रियासतों के ऐतिहासिक अभिलेखीय रिकॉर्ड एवं बहियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
I. 'अड़सट्टा' रिकॉर्ड शृंखला का संबंध जयपुर रियासत से है, जिसमें राज्य के कृषि एवं भू-राजस्व संबंधी विस्तृत रिकॉर्ड सुरक्षित रखे जाते थे। II. 'कागद बही' का संबंध मारवाड़ रियासत से है, जिसमें राज्य के कर्मचारियों के पदों एवं नियुक्तियों का विवरण दर्ज होता था। III. 'बाजे-तालिके' अभिलेख शृंखला किशनगढ़ रियासत की प्रशासनिक एवं कर व्यवस्था की प्रामाणिक जानकारी प्रदान करती है। IV. 'खरीता बही' एवं 'हकीकत बही' मारवाड़ रियासत के प्रमुख अभिलेखीय स्रोत हैं, जो क्रमशः व्यापारिक पत्राचार और दैनिक राजकीय राजस्व से संबंधित हैं।
उपर्युक्त में से कौन से कथन सही हैं?
सही उत्तर: (B)
व्याख्या: कथन II असत्य है। 'कागद बही' का संबंध बीकानेर रियासत से है, जिसमें बीकानेर राज्य के व्यापारिक मार्गों व वाणिज्यिक करों की सूचना दर्ज है। मारवाड़ रियासत में कर्मचारियों के पदों (ओहदों) का विवरण 'ओहदा बही' में रखा जाता था। अन्य सभी कथन (I, III, और IV) पूर्णतः सत्य हैं।
🏷️ [RPSC ASO (Agri.) 2024] [RPSC Research Scholar 2024] [RPSC Research Officer 2024]
प्र. 42: राजस्थान के प्रजामण्डल व सामाजिक जन-जागरण आन्दोलनों के प्रथम अधिवेशनों/संस्थापकों का कौन सा युग्म सही सुमेलित नहीं है?
सही उत्तर: (D)
व्याख्या: विकल्प (D) सुमेलित नहीं है। 1939 ई. में स्थापित किशनगढ़ प्रजामण्डल के अध्यक्ष 'जमाल शाह' (तथा कान्तिचन्द्र चौथाणी के सहयोग से) थे। 'मीठालाल व्यास' ने 1945 ई. में जोधपुर में जैसलमेर प्रजामण्डल की स्थापना की थी। अन्य सभी युग्म ऐतिहासिक दृष्टि से सही सुमेलित हैं।
प्र. 43: ब्रिटिश भारत में देशी रियासतों के अंतर्गत उत्तरदायी शासन की मांग हेतु स्थापित निम्नलिखित प्रजामण्डलों को उनकी स्थापना के सही कालक्रमानुसार (पहले से बाद के क्रम में) व्यवस्थित कीजिए:
व्याख्या: इन प्रजामण्डलों की स्थापना का सही कालक्रम इस प्रकार है: 1. बीकानेर प्रजामण्डल - 4 अक्टूबर 1936 (मघाराम वैद्य द्वारा कलकत्ता में)। 2. भरतपुर प्रजामण्डल - मार्च 1938 (किशनलाल जोशी, गोपीलाल यादव के प्रयासों से)। 3. मेवाड़ प्रजामण्डल - 24 अप्रैल 1938 (माणिक्यलाल वर्मा द्वारा उदयपुर में)। 4. करौली प्रजामण्डल - अप्रैल 1939 (त्रिलोकचंद माथुर द्वारा)। अतः सही क्रम 1, 2, 3, 4 है।
🏷️ [RPSC Research Officer 2024] [RPSC Assistant Archivist 2024] [RPSC Sub Inspector 2021]
प्र. 44: राजपूताना की रियासतों के प्रमुख ऐतिहासिक घटनाक्रमों (सूची-I) का उनसे संबंधित राज्यों/शासकों (सूची-II) के साथ सही मिलान कीजिए:
सूची-I (ऐतिहासिक घटनाक्रम/विशिष्टता) (A) मुगलों से संघर्ष हेतु दुर्गादास राठौड़ द्वारा गठबंधन (B) उत्तराधिकार संघर्ष में मराठों द्वारा 'दलेल सिंह' का समर्थन (C) वह रियासत जिसने मराठों को कभी भी कर (चौथ) नहीं दिया (D) 1615 ई. की मुगल-मेवाड़ संधि के तहत चित्तौड़ दुर्ग प्राप्त किया
सूची-II (रियासत/शासक) 1. बीकानेर राज्य 2. मेवाड़ (महाराणा अमर सिंह प्रथम) 3. बूंदी राज्य 4. मेवाड़ (महाराणा राजसिंह)
कूट:
सही उत्तर: (A)
व्याख्या: (A) दुर्गादास राठौड़ ने मुगलों (औरंगजेब) के विरुद्ध मेवाड़ के महाराणा राजसिंह के साथ गठबंधन किया था। (B) बूंदी राज्य के उत्तराधिकार संघर्ष में मराठों ने दलेल सिंह का समर्थन किया था। (C) बीकानेर राजपूताना की वह रियासत थी जिसने कूटनीति व भौगोलिक स्थिति के कारण मराठों को कभी कर नहीं दिया। (D) 1615 ई. में जहाँगीर और महाराणा अमर सिंह प्रथम के मध्य संधि हुई जिसमें चित्तौड़ वापस मिला परन्तु मरम्मत पर रोक थी।
🏷️ [RPSC Research Scholar 2024] [RPSC RAS/RTS Pre 2018]
प्र. 45: नीचे दो कथन दिए गए हैं, एक को अभिकथन (A) और दूसरे को कारण (R) के रूप में दर्शाया गया है:
अभिकथन (A): मुगल सम्राट अकबर की राजपूत नीति का मुख्य आधार राजपूत शासकों के साथ वैवाहिक संबंध स्थापित करना था, ताकि राजनीतिक स्थिरता और साम्राज्य का सुदृढ़ीकरण हो सके। कारण (R): रणथम्भौर के हाड़ा शासक (सुर्जन हाड़ा) ने बिना वैवाहिक संबंध स्थापित किए ही अकबर की अधीनता स्वीकार कर ली थी, फिर भी अकबर ने उन पर विशेष अनुग्रह करते हुए उन्हें रणथम्भौर व बूंदी का शासन सौंप दिया।
उपर्युक्त कथनों के संदर्भ में सही कूट का चयन कीजिए:
सही उत्तर: (B)
व्याख्या: अभिकथन (A) पूर्णतः सत्य है कि अकबर की नीति का मुख्य अंग वैवाहिक संबंध (जैसे आमेर, बीकानेर, जैसलमेर से) था। कारण (R) भी ऐतिहासिक रूप से सत्य है कि रणथम्भौर के सुर्जन हाड़ा ने 1569 ई. में बिना वैवाहिक संबंध बनाए अधीनता स्वीकार की और अकबर ने अनुग्रह किया। परन्तु कारण (R), अभिकथन (A) (वैवाहिक संबंधों की नीति के मूल सिद्धांत) की व्याख्या नहीं करता, बल्कि उस नीति के एक अपवाद/विशेष छूट को दर्शाता है। अतः दोनों सत्य हैं किन्तु सही व्याख्या नहीं है।
🏷️ [RPSC A.P. Lib. PTI (CE) 2023] [RPSC Research Scholar 2024] [RPSC School Lect. (Group-D) 2022]
प्र. 46: रणथम्भौर पर अलाउद्दीन खिलजी के आक्रमण (1301 ई.) एवं राजपूतों के प्रतिरोध के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन सा कथन असत्य है?
सही उत्तर: (D)
व्याख्या: कथन (D) असत्य है। अलाउद्दीन के आक्रमण का मुख्य कारण यह था कि हम्मीर देव ने शरणागत वत्सलता दिखाते हुए अलाउद्दीन के विद्रोही मंगोल सेनापति 'मुहम्मद शाह' को शरण दी थी (हत्या नहीं की थी)। 'रणमल और रतिपाल' हम्मीर के वे मंत्री थे जिन्होंने खिलजी के साथ गद्दारी कर दुर्ग के गुप्त मार्ग बताए थे। अन्य सभी कथन पूर्णतः सत्य हैं; नुसरत खाँ की मृत्यु हुई, प्रशासक उलूग खाँ बना, और तुर्कों ने मंजनिक व अर्रादा जैसे यंत्रों का प्रयोग किया था।
🏷️ [RPSC Research Scholar 2024] [RPSC Sr. Teacher Gr-II 2011]
प्र. 47: राजपूताना के इतिहास में चर्चित वह घटना किस विशिष्ट व्यक्तित्व से संबंधित है, जिसके विवरण नीचे दिए गए हैं?
• ये मेवाड़ के महाराणा भीम सिंह की पुत्री थीं। • इनके विवाह प्रस्ताव को लेकर जयपुर (सवाई जगत सिंह) और जोधपुर (महाराजा मानसिंह) के मध्य 1807 ई. में गिंगोली (परबतसर) का भीषण युद्ध हुआ था। • अमीर खां पिंडारी के दबाव व मेवाड़ को विनाश से बचाने हेतु 21 जुलाई 1810 ई. को इन्हें विष दे दिया गया, जिससे इनकी मृत्यु हो गई।
सही उत्तर: (C)
व्याख्या: यह विवरण मेवाड़ की राजकुमारी 'कृष्णा कुमारी' से संबंधित है। कृष्णा कुमारी विवाद राजपूताना के इतिहास का एक काला अध्याय है, जिसके कारण जयपुर और जोधपुर के मध्य मारकाट मची। अंततः पिंडारी के दबाव में 21 जुलाई 1810 को इन्हें जहर देकर मार दिया गया।
🏷️ [RPSC ASO (Agri.) 2024] [RPSC Research Scholar 2024] [RPSC RAS/RTS Pre 2013]
प्र. 48: बिजोलिया किसान आन्दोलन के ऐतिहासिक घटनाक्रम के संदर्भ में, निम्नलिखित में से किस राष्ट्रीय अधिवेशन में विजय सिंह पथिक के विशेष प्रयासों से लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक द्वारा इस आन्दोलन के समर्थन में प्रस्ताव रखा गया था, जो बिजोलिया के जागीरदारों (राव कृष्ण सिंह के 'चंवरी कर' एवं पृथ्वी सिंह के 'तलवार बंधाई कर') के दमनकारी कृत्यों के विरुद्ध एक राष्ट्रव्यापी राजनीतिक दबाव का कारण बना?
सही उत्तर: (B)
व्याख्या: दिसंबर 1919 ई. के भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के 'अमृतसर अधिवेशन' में विजय सिंह पथिक के आग्रह पर बाल गंगाधर तिलक ने बिजोलिया के किसानों के समर्थन में प्रस्ताव पेश किया था (यद्यपि गाँधीजी उस समय रियासतों में हस्तक्षेप के पक्ष में नहीं थे)। बिजोलिया में 1903 में कृष्ण सिंह ने 5 रुपये का 'चंवरी कर' और 1906 में पृथ्वी सिंह ने उत्तराधिकार शुल्क के रूप में 'तलवार बंधाई' कर लगाया था।
🏷️ [RPSC Research Scholar 2024] [RPSC Research Officer 2024] [RPSC School Lect. (SE) 2022]
प्र. 49: 1857 के विप्लव के दौरान राजपूताना में घटित प्रमुख घटनाओं व ब्रिटिश अधिकारियों की नियुक्तियों के संदर्भ में कौन से कथन पूर्णतः सत्य हैं?
1. 1857 की क्रांति के समय सिरोही रियासत के ब्रिटिश पॉलिटिकल एजेंट 'कैप्टन जे. डी. हॉल' थे। 2. कोटा में मेहराब खान व जयदयाल के नेतृत्व में हुए भीषण जन-विद्रोह को दबाने (मार्च 1858) का कार्य ब्रिटिश अधिकारी 'मेजर जनरल एच.जी. रॉबर्ट्स' ने किया था। 3. कोटा रियासत में विद्रोहियों से घिर जाने पर वहाँ के महाराव कृष्ण सिंह ने अपनी महारानी व अपनी सुरक्षा हेतु मेवाड़ के महाराणा 'स्वरूप सिंह' से सैन्य सहायता मांगी थी। 4. 1857 के समय भरतपुर रियासत के पॉलिटिकल एजेंट 'मेजर मॉरीसन' थे।
सही कूट का चयन कीजिए:
सही उत्तर: (D)
व्याख्या: दिए गए चारों कथन ऐतिहासिक दस्तावेजों के अनुसार सत्य हैं। सिरोही के पी.ए. जे.डी. हॉल थे। मेजर जनरल रॉबर्ट्स ने करौली की सेना के सहयोग से कोटा विद्रोह को दबाया था। कोटा महाराव ने मेवाड़ महाराणा स्वरूप सिंह से सहायता मांगी थी। भरतपुर के पी.ए. मेजर मॉरीसन थे, जिन्हें विद्रोहियों के डर से आगरा भागना पड़ा था।
सूची-II (उपलब्धि/घटना) 1. 1769 ई. में मेवाड़-मराठा सेनाओं के मध्य हुआ ऐतिहासिक युद्ध 2. चित्तौड़गढ़ में स्थित 'समाधीश्वर मंदिर' (त्रिभुवन नारायण मंदिर) का जीर्णोद्धार 3. मुगल सम्राट अकबर द्वारा 'देव बहादुर' की सम्मानजनक उपाधि से विभूषित 4. मारवाड़ राज्य में 'पट्टेदारी व्यवस्था' (भूमि नियंत्रण अधिकार) की विधिवत शुरुआत
कूट:
सही उत्तर: (A)
व्याख्या: (A) करौली के महाराजा गोपाल दास को अकबर ने 'देव बहादुर' की उपाधि दी थी। (B) मारवाड़ के राव मालदेव (हशमत वाला शासक) ने राज्य में पट्टेदारी व्यवस्था की शुरुआत की। (C) जनवरी 1769 में मेवाड़-मराठा युद्ध के समय मेवाड़ के महाराणा अरि सिंह थे। (D) महाराणा मोकल ने चित्तौड़ के परमार कालीन समाधीश्वर मंदिर का जीर्णोद्धार करवाया, जिसे मोकल जी का मंदिर भी कहा जाता है।
प्र. 51: राजस्थान में 19वीं एवं 20वीं शताब्दी में हुए सामाजिक-राजनैतिक सुधारों व उनसे जुड़े तथ्यों के संदर्भ में कौन सा कथन असत्य है?
सही उत्तर: (C)
व्याख्या: कथन (C) असत्य है। राजपूताना में 'कन्या वध' को गैर-कानूनी घोषित करने वाला प्रथम राज्य 'कोटा' था, जहाँ 1833 ई. में महाराव रामसिंह के समय पॉलिटिकल एजेंट विल्किंसन के प्रयासों से इस पर रोक लगी। इसके पश्चात 1834 में बूंदी और 1844 में जयपुर (लुडलो के प्रयास से) में रोक लगी। अन्य सभी कथन (वाल्टरकृत सभा 1888, तख्त सिंह का भूमि दान रोक 1850, और तुलसा भील संदेशवाहक) ऐतिहासिक दस्तावेजों के आधार पर पूर्णतः सत्य हैं।
🏷️ [RPSC Research Scholar 2024] [RPSC Research Officer 2024] [RPSC Curator 2023]
प्र. 52: राजस्थान की मध्यकालीन प्रशासनिक शब्दावलियों एवं व्यवस्थाओं के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
I. 'भाईबंद' अथवा 'भयाद' की विशिष्ट परंपरा का संबंध राजपूताना की 'जागीर प्रणाली' से था, जहाँ शासक अपने विश्वासपात्रों व रक्त-संबंधियों को भूमि सौंपते थे। II. संस्कृत अभिलेखों में गुजरात-राजस्थान सीमावर्ती क्षेत्र के 'चावड़ा वंश' के शासकों का उल्लेख 'चाप', 'चपोतक' या 'चाबोटक' के रूप में मिलता है, जिसका शाब्दिक अर्थ धनुष होता है। III. मेवाड़, डूंगरपुर, बांसवाड़ा और सिरोही क्षेत्रों में 'गमेती' (भील मुखिया) द्वारा अपने क्षेत्र से गुजरने वाले यात्रियों एवं व्यापारियों की सुरक्षा के बदले 'बोलाई' नामक कर वसूला जाता था।
उपर्युक्त में से कौन से कथन सही हैं?
सही उत्तर: (D)
व्याख्या: दिए गए तीनों कथन पूर्णतः सत्य हैं। भाईबंद या भयाद व्यवस्था जागीर प्रणाली का अभिन्न अंग थी जिसमें रक्त संबंधियों को भूमि दी जाती थी। चावड़ा वंश को संस्कृत साहित्य में चाप या चपोतक (धनुष) कहा गया है जो इनकी वीरता का प्रतीक था। आदिवासी क्षेत्रों में गमेती द्वारा सुरक्षा के नाम पर वसूला जाने वाला कर 'बोलाई' तथा रखवाली कर कहलाता था।
प्र. 53: राजस्थान में जन-जागृति व सामाजिक सुधार हेतु स्थापित की गई निम्नलिखित महत्वपूर्ण संस्थाओं को उनके स्थापना वर्ष के अनुसार (प्राचीन से नवीन क्रम में) व्यवस्थित कीजिए:
1. राजपूताना मध्य भारत सभा (अजमेर/दिल्ली अधिवेशन) 2. मारवाड़ यूथ लीग (जोधपुर) 3. जयपुर राज्य मीणा सुधार समिति (नीमकाथाना) 4. अखिल भारतीय देशी राज्य लोक परिषद् (बंबई)
सही कूट का चयन कीजिए:
सही उत्तर: (A)
व्याख्या: संस्थाओं की स्थापना का सही कालक्रम: 1. राजपूताना मध्य भारत सभा - 1918 ई. (दिल्ली के मारवाड़ी पुस्तकालय में जमनालाल बजाज के प्रयासों से)। 2. अखिल भारतीय देशी राज्य लोक परिषद् - 1927 ई. (बंबई में, दीवान बहादुर रामचन्द्र राव की अध्यक्षता में)। 3. मारवाड़ यूथ लीग - 1931 ई. (जोधपुर में जयनारायण व्यास द्वारा)। 4. मीणा सुधार समिति - 1944 ई. (नीमकाथाना में पंडित बंशीधर शर्मा की अध्यक्षता में)। अतः सही क्रम 1, 4, 2, 3 है।
🏷️ [RPSC Assistant Archivist 2024] [RPSC Sub Inspector 2021]
प्र. 54: नीचे दो कथन दिए गए हैं, एक को अभिकथन (A) और दूसरे को कारण (R) के रूप में दर्शाया गया है:
अभिकथन (A): 1615 ई. में मुगल सम्राट जहाँगीर और मेवाड़ के महाराणा अमर सिंह प्रथम के मध्य हुई संधि ने मेवाड़-मुगल के दीर्घकालीन रक्तपातपूर्ण संघर्ष को समाप्त कर दिया। कारण (R): इस संधि की शर्तों के अनुसार जहाँगीर ने मुगलों द्वारा विजित समस्त मेवाड़ क्षेत्र (चित्तौड़ दुर्ग सहित) महाराणा को वापस लौटा दिया, परन्तु इस कड़ी शर्त के साथ कि महाराणा भविष्य में कभी भी चित्तौड़ दुर्ग की मरम्मत (जीर्णोद्धार) नहीं करवा सकेगा।
उपर्युक्त कथनों के संदर्भ में सही कूट का चयन कीजिए:
सही उत्तर: (A)
व्याख्या: अभिकथन (A) और कारण (R) दोनों पूर्णतः सत्य हैं। खुर्रम (शाहजहाँ) के अभियानों से मेवाड़ की आर्थिक स्थिति जर्जर हो गई थी, जिससे 5 फरवरी 1615 को अमर सिंह को संधि करनी पड़ी। कारण (R) संधि की वह प्रमुख शर्त थी जिसने मेवाड़ को उसका गौरव (चित्तौड़) तो लौटाया परन्तु उसकी सैन्य सुदृढ़ीकरण (मरम्मत) पर रोक लगा दी, जिसने संघर्ष को कूटनीतिक विराम दिया। (बाद में महाराणा राजसिंह और कर्ण सिंह ने इस शर्त को तोड़ा था)। अतः कारण, अभिकथन की सही व्याख्या करता है।
प्र. 55: आधुनिक राजस्थान के इतिहास में रियासतों के महत्त्वपूर्ण संग्रहों, पुस्तकों एवं संस्थाओं का कौन सा युग्म सुमेलित नहीं है?
सही उत्तर: (B)
व्याख्या: विकल्प (B) सुमेलित नहीं है। 'खड़लाई आश्रम' की स्थापना भील समुदाय की सामाजिक-आर्थिक स्थिति में सुधार व शिक्षा हेतु 1934 ई. में 'माणिक्य लाल वर्मा' ने की थी, ना कि गोविन्द गुरु ने। गोविन्द गुरु ने 1883 में 'सम्प सभा' की स्थापना की थी। शेष सभी विकल्प ऐतिहासिक रूप से पूर्णतः सुमेलित हैं।
प्र. 56: देशी रियासतों में उत्तरदायी शासन की स्थापना हेतु गठित प्रजामण्डलों व उनके संस्थापकों के संदर्भ में (मई 2026 के अद्यतन विश्लेषण अनुसार) निम्नलिखित में से कौन सा कथन असत्य है?
सही उत्तर: (D)
व्याख्या: कथन (D) असत्य है। डूंगरपुर प्रजामण्डल की स्थापना 1944 ई. में 'वागड़ के गाँधी' भोगीलाल पाण्ड्या, नाना भाई व हरिदेव जोशी द्वारा की गई थी। रामनारायण चौधरी का मुख्य संबंध राजस्थान सेवा संघ और बेंगू किसान आन्दोलन से था। अन्य सभी प्रजामण्डलों (बीकानेर प्रजा परिषद्, जैसलमेर और झालावाड़) के संस्थापक ऐतिहासिक दृष्टि से सही सुमेलित हैं।
प्र. 57: राजस्थान के किसान एवं जनजाति आन्दोलनों में अपना सर्वोच्च बलिदान देने वाले शहीदों तथा आन्दोलनकारियों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
I. 2 अप्रैल 1923 को डाबी (बूंदी) में झंडा गीत गाते हुए पुलिस फायरिंग में 'नानक भील' शहीद हो गए थे। II. 'तुलसा भील' प्रख्यात स्वतंत्रता सेनानी विजय सिंह पथिक के विश्वसनीय संदेश वाहक के रूप में कार्य करते थे। III. 1947 ई. में डूंगरपुर के रास्तापाल गाँव में अपने शिक्षक सेंगाभाई को बचाने के प्रयास में वीरबाला 'कालीबाई' शहीद हुई थीं। IV. 1921 में रामनारायण चौधरी के नेतृत्व में शुरू हुए 'बेंगू किसान आन्दोलन' में ट्रेंच कमीशन की गोलाबारी में रूपाजी व कृपाजी धाकड़ शहीद हुए थे।
उपर्युक्त में से कौन से कथन पूर्णतः सत्य हैं?
सही उत्तर: (D)
व्याख्या: दिए गए चारों कथन पूर्णतः सत्य हैं। नानक भील बूंदी किसान आन्दोलन (डाबी काण्ड 1923) में शहीद हुए थे। तुलसा भील विजय सिंह पथिक के संदेशवाहक थे। रास्तापाल काण्ड (1947) में कालीबाई शहीद हुईं। बेंगू किसान आन्दोलन (1921) में रामनारायण चौधरी के नेतृत्व में आन्दोलन हुआ, जहाँ रूपाजी और कृपाजी शहीद हुए थे।
प्र. 58: राजपूताना की विभिन्न रियासतों द्वारा 19वीं शताब्दी में सामाजिक कुप्रथाओं को सर्वप्रथम गैर-कानूनी (अवैध) घोषित करने के संदर्भ में सूची-I का सूची-II से सही मिलान कीजिए:
सूची-I (कुप्रथा का उन्मूलन) (A) समाधि प्रथा पर रोक (1844 ई.) (B) कन्या भ्रूण वध पर सर्वप्रथम रोक (1833 ई.) (C) सती प्रथा पर सर्वप्रथम रोक लगाने वाली राजपूताना की प्रथम रियासत (D) भूमि दान को सामंतों द्वारा अवैध घोषित करना (1850 ई.)
व्याख्या: (A) 1844 ई. में जयपुर के पॉलिटिकल एजेंट मेजर लुडलो के प्रयासों से समाधि प्रथा को गैर-कानूनी घोषित किया गया। (B) कन्या वध पर सर्वप्रथम 1833 ई. में कोटा रियासत (महाराव रामसिंह के समय विल्किंसन के प्रयासों से) ने रोक लगाई। (C) राजस्थान में सती प्रथा सर्वप्रथम जयपुर रियासत में निषेधित की गई थी (विभिन्न ऐतिहासिक स्रोतों में बूंदी 1822 का भी उल्लेख मिलता है, परन्तु दिए गए RPSC PYQ विकल्पों के अनुसार जयपुर सत्य माना गया है)। (D) जोधपुर के महाराजा तख्त सिंह ने 1850 ई. में सामंतों द्वारा भूमि दान को अवैध घोषित किया था।
🏷️ [RPSC School Lect. (SE) 2022] [RPSC Asst. Engineer 2013]
प्र. 59: मारवाड़ (जोधपुर) रियासत में उत्तरदायी शासन एवं राजनीतिक जन-जागरण हेतु जयनारायण व्यास व अन्य नेताओं द्वारा स्थापित निम्नलिखित राजनीतिक संगठनों को उनके स्थापना वर्ष के कालक्रमानुसार (पहले से बाद के क्रम में) व्यवस्थित कीजिए:
I. मारवाड़ हितकारिणी सभा II. मारवाड़ प्रजामण्डल III. मारवाड़ यूथ लीग IV. मारवाड़ लोक परिषद्
सही कूट का चयन कीजिए:
सही उत्तर: (B)
व्याख्या: मारवाड़ के राजनैतिक संगठनों का स्थापना क्रम इस प्रकार है: 1. मारवाड़ हितकारिणी सभा - 1923 ई.। 2. मारवाड़ यूथ लीग - 1931 ई. (जयनारायण व्यास द्वारा)। 3. मारवाड़ प्रजामण्डल - 1934 ई. (भंवरलाल सर्राफ अध्यक्ष, जयनारायण व्यास की प्रेरणा से)। 4. मारवाड़ लोक परिषद् - 16 मई 1938 ई. (रणछोड़दास गट्टानी अध्यक्ष)। अतः सही क्रम I, III, II, IV है।
प्र. 60: राजस्थान में सामाजिक, धार्मिक एवं राष्ट्रीय जन-जागृति उत्पन्न करने वाली प्रमुख संस्थाओं व उनके संस्थापकों के संदर्भ में कौन से कथन पूर्णतः सत्य हैं?
1. 'सम्प सभा' की स्थापना 1883 ई. में गोविन्द गुरु द्वारा की गई थी, जिसका उद्देश्य भील समुदाय में सांस्कृतिक व राजनीतिक जागृति पैदा करना था। 2. 'वीर भारत समाज' की स्थापना प्रख्यात क्रांतिकारी नेता विजय सिंह पथिक द्वारा की गई थी। 3. 'वीर भारत सभा' का गठन 1910 ई. में स्वतंत्रता सेनानी एवं शिक्षाविद् केसरी सिंह बारहठ द्वारा किया गया था। 4. 'श्री देश हितैषिणी सभा' की स्थापना 2 जुलाई 1877 ई. को उदयपुर में महाराणा सज्जन सिंह की अध्यक्षता में की गई थी, जो एक प्रमुख समाज सुधार संस्था थी।
सही कूट का चयन कीजिए:
सही उत्तर: (D)
व्याख्या: दिए गए चारों कथन ऐतिहासिक तथ्यों के आधार पर पूर्णतः सत्य हैं। गोविन्द गुरु ने 1883 में सम्प सभा बनाई। विजय सिंह पथिक ने 'वीर भारत समाज' की स्थापना की। केसरी सिंह बारहठ ने 1910 में गुप्त क्रांतिकारी संगठन 'वीर भारत सभा' की स्थापना की। उदयपुर में समाज सुधार (विवाह व मृत्युभोज खर्च कम करने) हेतु 1877 में महाराणा सज्जन सिंह ने 'देश हितैषिणी सभा' की स्थापना की।
🏷️ [RPSC Sr. Teacher Gr-II 31/10/2018]
प्र. 61: नीचे दो कथन दिए गए हैं, एक को अभिकथन (A) और दूसरे को कारण (R) के रूप में दर्शाया गया है:
अभिकथन (A): वर्ष 1936 ई. में जोधपुर (मारवाड़) प्रजामण्डल द्वारा रियासत में 'कृष्णा दिवस' मनाया गया। कारण (R): यह दिवस मारवाड़ रियासत में महिलाओं के अधिकारों के हनन और रियासती अत्याचारों के खिलाफ, विशेषकर कृष्णा कुमारी नामक विधवा महिला के अपहरण व न्याय न मिलने के विरोध में जन-जागृति हेतु मनाया गया था।
उपर्युक्त कथनों के संदर्भ में सही कूट का चयन कीजिए:
सही उत्तर: (A)
व्याख्या: अभिकथन (A) और कारण (R) दोनों पूर्णतः सत्य हैं। जोधपुर प्रजामण्डल ने 1936 में बम्बई में कृष्णा कुमारी के अपहरण की घटना को लेकर 'कृष्णा दिवस' मनाया था। कृष्णा नाम की महिला का कुछ रसूखदार लोगों द्वारा अपहरण कर लिया गया था और राज्य सरकार द्वारा न्याय नहीं दिया गया, जिसके विरोध में प्रजामण्डल ने यह दिवस मनाकर रियासती अत्याचारों की पोल खोली। अतः कारण, अभिकथन की सही व्याख्या करता है।
🏷️ [RPSC RAS/RTS Pre 1997-98] [RPSC M.V.S.I. (P-1) 2011]
प्र. 62: राजस्थान के राष्ट्रीय आन्दोलन में अपने प्राणों की आहुति देने वाले उस अमर शहीद को पहचानिए, जिसके विवरण नीचे दिए गए हैं:
• इनका जन्म जैसलमेर में हुआ था और वे वहीं के प्रजामण्डल व राजनीतिक जन-जागरण के प्रमुख नेता थे। • इन्होंने जैसलमेर रियासत के भ्रष्ट और निरंकुश शासन (महारावल जवाहर सिंह के समय) के खिलाफ आवाज उठाई। • राजद्रोह के आरोप में 24 मई 1941 को इन्हें जेल में डाल दिया गया, जहाँ अमानवीय यातनाओं (केरोसिन छिड़ककर जलाने) के कारण अंततः अप्रैल 1946 में इनका निधन हो गया।
सही उत्तर: (C)
व्याख्या: यह विवरण जैसलमेर के अमर शहीद 'सागरमल गोपा' का है। उन्होंने जैसलमेर में 'जैसलमेर का गुंडाराज' और 'आजादी के दीवाने' जैसी पुस्तकें लिखकर जन-जागृति फैलाई थी, जिसके कारण उन्हें जेल में डालकर अमानवीय यातनाएं दी गईं और 1946 में वे शहीद हो गए।
🏷️ [RPSC School Lect. (SE) G-B 2022] [RPSC Assistant jailor 2013] [RPSC Sr. Teacher Gr II (SE) Group-C 2022]
प्र. 63: 1857 की क्रांति के समय राजपूताना की रियासतों एवं वहाँ के तत्कालीन शासकों का कौन सा युग्म सही सुमेलित नहीं है?
सही उत्तर: (D)
व्याख्या: विकल्प (D) सुमेलित नहीं है। 1857 की क्रांति के समय मारवाड़ (जोधपुर) के शासक 'महाराजा तख्त सिंह' थे, जिन्होंने विद्रोहियों के दमन हेतु मैक मेसन के आदेश पर अपनी सेना अजमेर भेजी थी। धौलपुर के राजा भगवंत सिंह, करौली के मदन पाल, और मेवाड़ के महाराणा स्वरूप सिंह थे।
🏷️ [RPSC School Lect. 2015] [RPSC RAS/RTS Pre 2021] [RPSC RAS/RTS Pre 1996]
प्र. 64: राजस्थान में पत्रकारिता व प्रिंटिंग प्रेस के विकास के संदर्भ में निम्नलिखित संस्थाओं/समाचार पत्रों का उनके संस्थापकों/प्रकाशन स्थलों के साथ सही मिलान कीजिए:
सूची-I (A) वैदिक यंत्रालय (छापाखाना, 1880 ई.) (B) राजपूताना समाचार (19वीं सदी का साप्ताहिक पत्र) (C) प्रताप (जिसने बिजोलिया आन्दोलन को राष्ट्रीय पहचान दी) (D) राजस्थान केसरी (1920 ई.)
सूची-II 1. कानपुर (गणेश शंकर विद्यार्थी) 2. अजमेर (महर्षि दयानंद सरस्वती द्वारा स्थापित) 3. वर्धा (विजय सिंह पथिक) 4. मास्टर कन्हैया लाल (जयपुर से प्रकाशित)
कूट:
सही उत्तर: (A)
व्याख्या: (A) वैदिक यंत्रालय छापाखाना 1880 में महर्षि दयानंद सरस्वती द्वारा अजमेर में स्थापित किया गया था। (B) राजपूताना समाचार मास्टर कन्हैया लाल द्वारा निकाला जाता था। (C) 'प्रताप' अखबार का प्रकाशन कानपुर से गणेश शंकर विद्यार्थी करते थे, जिसमें पथिक जी ने बिजोलिया की खबरें छपवाईं। (D) राजस्थान केसरी विजय सिंह पथिक ने 1920 में वर्धा से निकाला था।
प्र. 65: राजस्थान के ऐतिहासिक कृषक एवं जनजातीय करों/प्रथाओं के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन असत्य है?
सही उत्तर: (D)
व्याख्या: कथन (D) असत्य है। 'कांसा परोसा' कृषि उपज या धार्मिक कर नहीं था, बल्कि यह राजस्थान की प्राचीन रियासतों में एक प्रकार का सामाजिक कर था, जो विवाह तथा मृत्युभोज के अवसर पर किसानों से वसूला जाता था। अन्य सभी कथन—बोलाई कर (सुरक्षा हेतु), चंवरी कर (कृष्ण सिंह 1903), और तलवार बंधाई (पृथ्वी सिंह 1906)—पूर्णतः सत्य हैं।
🏷️ [RPSC Sr. Teacher sanskrit-2018] [RPSC School Lect. (S.E.) 2018]
प्र. 66: 1857 की क्रांति के समय मेवाड़ रियासत की स्थिति के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
I. 1857 के विद्रोह के समय मेवाड़ (उदयपुर) का ब्रिटिश पॉलिटिकल एजेंट कैप्टन सी. एल. शॉवर्स था। II. मेवाड़ के महाराणा स्वरूप सिंह ने क्रांति को कुचलने के लिए अंग्रेजों का सक्रिय समर्थन किया तथा उन्हें सैन्य सहायता उपलब्ध करवाई। III. महाराणा के विपरीत, मेवाड़ रियासत की आम जनता और सलूम्बर, शाहपुरा व कोठारिया के सामंतों ने क्रांतिकारियों का खुला समर्थन किया था। IV. आउवा के विद्रोही ठाकुर खुशाल सिंह को मेवाड़ के सलूम्बर ठिकाने के रावत जोध सिंह चौहान ने शरण दी थी।
उपर्युक्त में से कौन से कथन सही हैं?
सही उत्तर: (B)
व्याख्या: कथन IV असत्य है क्योंकि आउवा के विद्रोही ठाकुर खुशाल सिंह को मेवाड़ के 'कोठारिया' ठिकाने के रावत जोध सिंह ने शरण दी थी, न कि सलूम्बर के रावत ने। शेष सभी कथन पूर्णतः सत्य हैं: पी.ए. शॉवर्स था, महाराणा स्वरूप सिंह ने अंग्रेजों का साथ दिया, और सलूम्बर/कोठारिया के सामंतों ने क्रांतिकारियों का साथ दिया था।
🏷️ [RPSC Agriculture Officer 2020] [RPSC RAS/RTS Pre 1999-2000] [RPSC RAS/RTS Pre 2009]
प्र. 67: राजस्थान के राजनीतिक एकीकरण (मई 2026 अद्यतन प्रशासनिक रूपरेखा के परिप्रेक्ष्य में) के दौरान गठित विभिन्न संघों को उनके निर्माण के सही कालक्रमानुसार (प्रथम चरण से आगे के क्रम में) व्यवस्थित कीजिए:
1. वृहद् राजस्थान (जयपुर, जोधपुर, बीकानेर, जैसलमेर का विलय) 2. मत्स्य संघ (अलवर, भरतपुर, धौलपुर, करौली का विलय) 3. संयुक्त राजस्थान (पूर्व राजस्थान में उदयपुर का विलय) 4. राजस्थान संघ / पूर्व राजस्थान (कोटा, बूंदी सहित 9 रियासतों का विलय)
सही कूट का चयन कीजिए:
सही उत्तर: (A)
व्याख्या: राजस्थान एकीकरण का सही कालक्रम: 1. प्रथम चरण (मत्स्य संघ) - 18 मार्च 1948। 2. द्वितीय चरण (राजस्थान संघ / पूर्व राजस्थान) - 25 मार्च 1948। 3. तृतीय चरण (संयुक्त राजस्थान) - 18 अप्रैल 1948। 4. चतुर्थ चरण (वृहद् राजस्थान) - 30 मार्च 1949। अतः सही क्रम 2, 4, 3, 1 है।
🏷️ [RPSC Head Master (S.S.) 2011] [RPSC School Lect. (Group-D) 2022] [RPSC Asst. Agri. Officer 2018 Paper-I]
प्र. 68: स्वतंत्रता आन्दोलन के दौरान प्रजामण्डलों की स्थापना व सामाजिक सुधार करने वाले विशिष्ट राजस्थानी व्यक्तित्वों (सूची-I) का उनके उपनामों/कार्यक्षेत्रों (सूची-II) के साथ सही मिलान कीजिए:
सूची-I (व्यक्तित्व) (A) भोगीलाल पाण्ड्या (B) गोकुलभाई भट्ट (C) मीठालाल व्यास (D) कन्हैयालाल मित्तल व मांगीलाल भव्य
सूची-II (उपनाम/कार्यक्षेत्र) 1. राजस्थान के गाँधी (सिरोही प्रजामण्डल के संस्थापक) 2. वागड़ के गाँधी (डूंगरपुर प्रजामण्डल व हरिजन सेवा समिति) 3. झालावाड़ राज्य प्रजामण्डल के संस्थापक 4. जैसलमेर प्रजामण्डल के संस्थापक
कूट:
सही उत्तर: (B)
व्याख्या: (A) भोगीलाल पाण्ड्या को 'वागड़ का गाँधी' कहा जाता है, जिन्होंने डूंगरपुर में हरिजन सेवा समिति व प्रजामण्डल की स्थापना की। (B) गोकुलभाई भट्ट को 'राजस्थान का गाँधी' कहा जाता है, जो सिरोही प्रजामण्डल से जुड़े थे। (C) मीठालाल व्यास ने 1945 में जैसलमेर प्रजामण्डल की स्थापना की। (D) कन्हैयालाल मित्तल व मांगीलाल भव्य ने झालावाड़ प्रजामण्डल की स्थापना की थी।
🏷️ [RPSC Research Assistant 2016] [RPSC RAS/RTS Pre 1996] [RPSC Sr. Teacher Sanskrit-2022 Group A]
प्र. 69: नीचे दो कथन दिए गए हैं, एक को अभिकथन (A) और दूसरे को कारण (R) के रूप में दर्शाया गया है:
अभिकथन (A): विजय सिंह पथिक ने बिजोलिया किसान आन्दोलन को मेवाड़ की सीमाओं से निकालकर समूचे भारत में चर्चा का विषय बना दिया और इसे राष्ट्रीय पहचान दिलाई। कारण (R): विजय सिंह पथिक ने अपने मित्र गणेश शंकर विद्यार्थी द्वारा कानपुर से प्रकाशित होने वाले राष्ट्रवादी समाचार-पत्र 'प्रताप' के माध्यम से बिजोलिया के किसानों पर हो रहे अत्याचारों की खबरें पूरे देश में प्रसारित करवाईं।
उपर्युक्त कथनों के संदर्भ में सही कूट का चयन कीजिए:
सही उत्तर: (A)
व्याख्या: अभिकथन (A) और कारण (R) दोनों पूर्णतः सत्य हैं। 1916 में पथिक जी के जुड़ने के बाद बिजोलिया आन्दोलन को नई दिशा मिली। उन्होंने कानपुर से गणेश शंकर विद्यार्थी द्वारा निकाले जाने वाले 'प्रताप' अखबार में बिजोलिया की दयनीय स्थिति पर लेख छपवाए, जिससे यह आन्दोलन राष्ट्रीय स्तर पर चर्चित हो गया। अतः कारण (R), अभिकथन (A) की बिल्कुल सटीक व्याख्या करता है।
प्र. 70: राजस्थान व अखिल भारतीय स्तर पर स्थापित प्रमुख रियासती एवं राष्ट्रीय संस्थाओं के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन से कथन/समूह सत्य हैं?
1. 'राजस्थान सेवा संघ' की स्थापना 1919 ई. में वर्धा (महाराष्ट्र) में विजय सिंह पथिक, रामनारायण चौधरी और हरिभाई किंकर द्वारा की गई। 2. समाज सुधार हेतु 'देश हितैषिणी सभा' की स्थापना 1877 ई. में महाराणा सज्जन सिंह द्वारा उदयपुर में की गई। 3. 'नरेन्द्र मण्डल' (चेंबर ऑफ प्रिंसेस) की स्थापना 1921 ई. में हुई, जिसके प्रथम चांसलर बीकानेर के महाराजा गंगा सिंह बने। 4. 'अखिल भारतीय देशी राज्य लोक परिषद्' का प्रथम अधिवेशन 1927 ई. में बंबई में दीवान बहादुर रामचन्द्र राव की अध्यक्षता में हुआ था।
सही कूट का चयन कीजिए:
सही उत्तर: (D)
व्याख्या: दिए गए चारों समूह पूर्णतः सत्य हैं। राजस्थान सेवा संघ 1919 में वर्धा में बना और 1920 में अजमेर लाया गया। देश हितैषिणी सभा 2 जुलाई 1877 को उदयपुर में बनी। नरेन्द्र मण्डल 8 फरवरी 1921 को बना, जिसमें 120 सदस्य थे और महाराजा गंगा सिंह प्रथम चांसलर थे। अखिल भारतीय देशी राज्य लोक परिषद् का पहला अधिवेशन 1927 में बंबई में हुआ था।
🏷️ [RPSC Asst. Town Planner-2022] [RPSC Sr. Teacher Gr-II 28/10/2018] [RPSC RAS/RTS Pre 2018] [RPSC Sr. Teacher Gr II S.E. (G-B) 2022 Re-Exam]
प्र. 71: राजस्थान के राजनैतिक एकीकरण (नवीन 41 जिलों की प्रशासनिक व्यवस्था मई 2026 के परिप्रेक्ष्य में) के विभिन्न चरणों (सूची-I) का उनके तत्कालीन नियुक्त प्रधानमंत्रियों (सूची-II) के साथ सही मिलान कीजिए:
सूची-I (एकीकरण के चरण) (A) प्रथम चरण (मत्स्य संघ - 18 मार्च 1948) (B) द्वितीय चरण (राजस्थान संघ/पूर्व राजस्थान - 25 मार्च 1948) (C) तृतीय चरण (संयुक्त राजस्थान - 18 अप्रैल 1948) (D) चतुर्थ चरण (वृहद् राजस्थान - 30 मार्च 1949)
सूची-II (नियुक्त प्रधानमंत्री) 1. गोकुल लाल असावा 2. हीरालाल शास्त्री 3. शोभाराम कुमावत 4. माणिक्य लाल वर्मा
कूट:
सही उत्तर: (A)
व्याख्या: राजस्थान का एकीकरण 7 चरणों में पूर्ण हुआ था। प्रथम चरण 'मत्स्य संघ' के प्रधानमंत्री शोभाराम कुमावत थे। द्वितीय चरण 'राजस्थान संघ' (जिसमें कोटा, बूँदी आदि 9 रियासतें थीं) के प्रधानमंत्री गोकुल लाल असावा बने। तृतीय चरण 'संयुक्त राजस्थान' (जिसमें उदयपुर का विलय हुआ) के प्रधानमंत्री माणिक्य लाल वर्मा बनाए गए। चतुर्थ चरण 'वृहद् राजस्थान' (जिसमें जयपुर, जोधपुर, बीकानेर, जैसलमेर का विलय हुआ) के प्रधानमंत्री हीरालाल शास्त्री बने।
प्र. 72: ब्रिटिश भारत में देशी रियासतों में उत्तरदायी शासन की स्थापना हेतु गठित प्रजामण्डलों एवं उनके स्थापना स्थलों के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन सा कथन असत्य है?
सही उत्तर: (D)
व्याख्या: कथन (D) असत्य है क्योंकि 24 अप्रैल 1938 को माणिक्य लाल वर्मा द्वारा स्थापित मेवाड़ प्रजामण्डल की स्थापना रियासत के बाहर नहीं, बल्कि 'उदयपुर' में ही की गई थी, और वहीं इसका अस्थायी कार्यालय भी स्थापित हुआ था। इसके प्रथम अध्यक्ष बलवंत सिंह मेहता व उपाध्यक्ष भूरेलाल बया थे। अन्य सभी प्रजामण्डल (बीकानेर-कलकत्ता, सिरोही-बम्बई, जैसलमेर-जोधपुर) रियासत से बाहर स्थापित हुए थे जो पूर्णतः सत्य हैं।
प्र. 73: राजस्थान में राजनैतिक जन-जागरण और स्वतंत्रता संग्राम में महती भूमिका निभाने वाले समाचार-पत्रों एवं उनके संस्थापकों/विशिष्टताओं के संदर्भ में कौन से कथन सत्य हैं?
1. 'मजहरूल-सरूर' (1849 ई.) राजस्थान का प्रथम समाचार-पत्र था, जिसका प्रकाशन भरतपुर से हिन्दी और उर्दू दोनों भाषाओं में होता था। 2. 1920 के दशक में 'त्याग भूमि' नामक मासिक हिन्दी समाचार-पत्र का संपादन प्रख्यात राजनीतिज्ञ हरिभाऊ उपाध्याय द्वारा किया गया था। 3. विजय सिंह पथिक द्वारा स्थापित 'राजस्थान सेवा संघ' ने 1922 ई. में अजमेर से 'नवीन राजस्थान' का प्रकाशन किया, जिसे प्रतिबंधित किए जाने पर 'तरुण राजस्थान' के नाम से प्रकाशित किया गया। 4. 'राजपुताना गजट' के संपादक मुंशी समर्थदान चारण थे, जबकि 'राजस्थान समाचार' मौलवी मुराद अली द्वारा प्रकाशित किया जाता था।
सही कूट का चयन कीजिए:
सही उत्तर: (A)
व्याख्या: कथन 4 असत्य है क्योंकि यह परस्पर विपरीत लिखा गया है। 'राजपुताना गजट' के संपादक 'मौलवी मुराद अली' थे, जबकि 1889 ई. में अजमेर से प्रकाशित 'राजस्थान समाचार' के संपादक 'मुंशी समर्थदान चारण' थे। शेष सभी कथन (मजहरूल-सरूर भरतपुर से 1849 में, त्याग भूमि हरिभाऊ उपाध्याय द्वारा, तथा नवीन/तरुण राजस्थान विजय सिंह पथिक/राजस्थान सेवा संघ द्वारा) पूर्णतः सत्य हैं।
प्र. 74: रियासती शासन के दौरान राजस्थान में कृषकों एवं जनजातियों पर हुए भीषण अत्याचारों व नरसंहारों की निम्नलिखित दुखद घटनाओं को उनके घटित होने के सही कालक्रमानुसार (पहले से बाद के क्रम में) व्यवस्थित कीजिए:
I. नीमूचाणा काण्ड (अलवर) II. मानगढ़ पहाड़ी हत्याकाण्ड (गोविन्द गुरु के अनुयायियों पर) III. डाबड़ा काण्ड (डीडवाना, नागौर) IV. चण्डावल काण्ड (मारवाड़)
सही कूट का चयन कीजिए:
सही उत्तर: (A)
व्याख्या: इन ऐतिहासिक काण्डों का सही कालक्रम इस प्रकार है: 1. मानगढ़ पहाड़ी हत्याकाण्ड - 17 नवंबर 1913 ई. (भीलों का नरसंहार)। 2. नीमूचाणा काण्ड - 14 मई 1925 ई. (महात्मा गांधी ने इसे जलियांवाला बाग से भी वीभत्स कहा)। 3. चण्डावल काण्ड - 28 मार्च 1942 ई. (मारवाड़ क्षेत्र में)। 4. डाबड़ा काण्ड - 13 मार्च 1947 ई. (नागौर के डीडवाना में, जहाँ 5 किसान शहीद हुए)। अतः सही क्रम II, I, IV, III है।
प्र. 75: नीचे दो कथन दिए गए हैं, एक को अभिकथन (A) और दूसरे को कारण (R) के रूप में दर्शाया गया है:
अभिकथन (A): 1938 ई. में राजपूताना की विभिन्न देशी रियासतों में प्रजामण्डलों की विधिवत स्थापना व राजनीतिक चेतना के विस्तार में अभूतपूर्व तेजी आई। कारण (R): 1938 ई. में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के हरिपुरा अधिवेशन में (सुभाष चंद्र बोस की अध्यक्षता में) देशी रियासतों में चल रहे जन-आन्दोलनों व उत्तरदायी शासन की माँग को कांग्रेस द्वारा अपना नैतिक समर्थन देने का ऐतिहासिक प्रस्ताव पारित किया गया था।
उपर्युक्त कथनों के संदर्भ में सही कूट का चयन कीजिए:
सही उत्तर: (A)
व्याख्या: अभिकथन (A) और कारण (R) दोनों पूर्णतः सत्य हैं। 1938 ई. में विभिन्न राज्यों (जैसे मेवाड़, भरतपुर, अलवर, करौली आदि) में प्रजामण्डलों की स्थापना हुई। इसका मुख्य कारण 1938 का हरिपुरा कांग्रेस अधिवेशन था, जिसमें पहली बार कांग्रेस ने रियासतों में चल रहे स्वतंत्रता आन्दोलनों के प्रति अपनी सहानुभूति व समर्थन प्रकट किया था। अतः कारण (R), अभिकथन (A) की बिल्कुल सटीक व्याख्या करता है।
प्र. 76: राजस्थान में जन-जागृति एवं राजनीतिक चेतना के जन्मदाता माने जाने वाले उस प्रख्यात व्यक्तित्व को पहचानिए, जिनके विवरण नीचे दिए गए हैं:
• इनका जन्म 9 सितंबर 1880 को जयपुर में हुआ था और इन्होंने अपने करियर की शुरुआत चौमू के ठाकुर (देवी सिंह) के निजी सचिव के रूप में की थी। • इन्होंने 1907 ई. में जयपुर में 'जैन वर्धमान विद्यालय' की स्थापना की, जो वस्तुतः क्रांतिकारियों को प्रशिक्षण देने का एक प्रमुख केंद्र था। • इन्होंने रासबिहारी बोस को अपना मार्गदर्शक माना और अपना अंतिम समय अजमेर में व्यतीत किया।
सही उत्तर: (C)
व्याख्या: यह विवरण प्रख्यात क्रांतिकारी और शिक्षाविद् 'अर्जुनलाल सेठी' का है। उन्होंने चौमू के ठाकुर के निजी सचिव के रूप में कार्य किया, परन्तु बाद में 1906-07 में जयपुर में वर्धमान विद्यालय की स्थापना की जिसका मुख्य उद्देश्य क्रांतिकारियों को प्रशिक्षित करना था। उन्होंने अपना अंतिम समय अजमेर में ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती की दरगाह क्षेत्र में बिताया था।
प्र. 77: राजस्थान व अखिल भारतीय स्तर पर स्थापित प्रमुख रियासती एवं राष्ट्रीय संस्थाओं के संदर्भ में (मई 2026 अद्यतन परिप्रेक्ष्य में) निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
I. राजपूताना मध्य भारत सभा की स्थापना 1918 ई. में दिल्ली के चाँदनी चौक स्थित 'मारवाड़ी पुस्तकालय' में जमनालाल बजाज के प्रयासों से हुई थी। II. 'राजस्थान सेवा संघ' की स्थापना 1919 ई. में वर्धा (महाराष्ट्र) में विजय सिंह पथिक, रामनारायण चौधरी व हरिभाई किंकर द्वारा की गई, जिसे 1920 में अजमेर स्थानांतरित किया गया। III. 'अखिल भारतीय देशी राज्य लोक परिषद्' का प्रथम अधिवेशन 1927 ई. में बंबई में दीवान बहादुर रामचन्द्र राव की अध्यक्षता में आयोजित हुआ था। IV. 'नरेन्द्र मण्डल' (चेंबर ऑफ प्रिंसेस) की स्थापना 8 फरवरी 1921 को हुई, जिसमें 120 रियासतें शामिल थीं और बीकानेर के महाराजा गंगा सिंह इसके प्रथम चांसलर बने।
उपर्युक्त में से कौन से कथन सही हैं?
सही उत्तर: (D)
व्याख्या: दिए गए चारों कथन ऐतिहासिक तथ्यों के आधार पर पूर्णतः सत्य हैं। राजपूताना मध्य भारत सभा 1918 में दिल्ली में बनी। राजस्थान सेवा संघ 1919 में वर्धा में स्थापित होकर 1920 में अजमेर आया। अखिल भारतीय देशी राज्य लोक परिषद् का पहला अधिवेशन 1927 में बंबई में रामचन्द्र राव की अध्यक्षता में हुआ। नरेन्द्र मण्डल 1921 में बना, जिसके प्रथम चांसलर महाराजा गंगा सिंह थे।
🏷️ [RPSC Senior Physical Edu.-2022 Paper-I] [RPSC School Lect. (Coach) 2013] [RPSC Asst. Prof. 2020 Paper-III] [RPSC School Lect. (SE) 2022]
प्र. 78: 1857 के विप्लव के समय राजपूताना की विभिन्न रियासतों में नियुक्त ब्रिटिश पॉलिटिकल एजेंटों एवं स्थानीय विद्रोह के नेतृत्वकर्ताओं का कौन सा युग्म सही सुमेलित नहीं है?
सही उत्तर: (D)
व्याख्या: विकल्प (D) सुमेलित नहीं है। 1857 के विद्रोह के समय मारवाड़ (जोधपुर) रियासत का पॉलिटिकल एजेंट 'मैक मेसन' था, जिसका सिर आउवा के ठाकुर खुशाल सिंह ने काटकर किले पर लटका दिया था। 'कर्नल ईडन' जयपुर रियासत के पॉलिटिकल एजेंट थे। अन्य सभी विकल्प (कोटा-मेजर बर्टन, भरतपुर-मेजर मॉरीसन, मेवाड़-शॉवर्स) पूर्णतः सही सुमेलित हैं।
प्र. 79: मेवाड़ के प्रतापी शासक महाराणा सांगा द्वारा लड़े गए निम्नलिखित ऐतिहासिक युद्धों (सूची-I) का उनके घटित होने के वर्ष/विपक्षियों (सूची-II) के साथ सही मिलान कीजिए:
सूची-I (ऐतिहासिक युद्ध) (A) खातौली का युद्ध (B) गागरोन का युद्ध (C) बयाना का युद्ध (D) खानवा का युद्ध
सूची-II (वर्ष एवं विपक्षी) 1. फरवरी 1527 ई. (बाबर की सेना को पराजित किया) 2. 17 मार्च 1527 ई. (बाबर से पराजय) 3. 1517 ई. (दिल्ली सुल्तान इब्राहिम लोदी को पराजित किया) 4. 1519 ई. (मालवा के महमूद खिलजी द्वितीय को पराजित किया)
कूट:
सही उत्तर: (B)
व्याख्या: (A) खातौली का युद्ध (वर्तमान कोटा/बूंदी सीमा) 1517 ई. में इब्राहिम लोदी और सांगा के मध्य हुआ। (B) गागरोन का युद्ध 1519 ई. में मालवा के महमूद खिलजी द्वितीय के विरुद्ध लड़ा गया। (C) बयाना का युद्ध फरवरी 1527 में लड़ा गया, जिसमें सांगा ने बाबर की सेना को हराया। (D) खानवा का युद्ध 17 मार्च 1527 को लड़ा गया, जिसमें बाबर की तुगलमा पद्धति के कारण सांगा की पराजय हुई।
प्र. 80: राजपूत शासकों के दरबार में आश्रित विद्वानों और उनकी रचनाओं के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन सा कथन असत्य है?
सही उत्तर: (C)
व्याख्या: कथन (C) असत्य है। महाराणा कुम्भा ने 'संगीतराज', 'नृत्यरत्नकोष' आदि ग्रंथों की रचना की थी, परन्तु 'नेह तरंग' उनकी रचना नहीं है। 'नेह तरंग' के रचयिता बूंदी के राव बुद्ध सिंह थे। शेष सभी कथन पूर्णतः सत्य हैं: पृथ्वीराज चौहान के दरबार में विद्यापति गौड़ व जयानक थे, जसवंत सिंह के दरबार में दलपति मिश्र व बनारसी दास थे, और महाराणा प्रताप के दरबारी चक्रपाणी मिश्र ने 'मुहूर्त्तमाला' लिखी थी।
🏷️ [RPSC Protection Officer-2022] [RPSC Sub Inspector 2021]
प्र. 81: राजपूताना के इतिहास में वर्चस्व एवं साम्राज्य विस्तार को लेकर लड़े गए निम्नलिखित ऐतिहासिक युद्धों को उनके घटित होने के सही कालक्रमानुसार (प्राचीन से नवीन के क्रम में) व्यवस्थित कीजिए:
1. सारंगपुर का युद्ध (मेवाड़-मालवा संघर्ष) 2. गिरी-सुमेल का युद्ध (शेरशाह सूरी व मालदेव) 3. दत्ताणी का युद्ध (राव सुरताण व मुगल सेना) 4. गिंगोली का युद्ध (कृष्णा कुमारी विवाद)
सही कूट का चयन कीजिए:
सही उत्तर: (C)
व्याख्या: इन युद्धों का सही ऐतिहासिक कालक्रम इस प्रकार है: 1. सारंगपुर का युद्ध - 1437 ई. (राणा कुम्भा और महमूद खिलजी प्रथम के मध्य)। 2. गिरी-सुमेल का युद्ध - 5 जनवरी 1544 ई. (शेरशाह सूरी और राव मालदेव के सेनापतियों के मध्य)। 3. दत्ताणी का युद्ध - 1583 ई. (राव सुरताण और मुगलों के मध्य)। 4. गिंगोली का युद्ध - 1807 ई. (कृष्णा कुमारी विवाह विवाद को लेकर जयपुर और जोधपुर के मध्य परबतसर में)। अतः सही क्रम 1, 2, 3, 4 है।
🏷️ [RPSC Curator 2023] [RPSC Sr. Teacher Gr II S.E. (TSP) - 2018] [RPSC Agriculture Officer 2020]
प्र. 82: राजपूताना के इतिहास में महत्वपूर्ण साक्ष्य प्रस्तुत करने वाले 'बिजोलिया शिलालेख' (1170 ई.) के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन सा तथ्य पूर्णतः सत्य है, जो चौहान वंश की उत्पत्ति व राजस्थान की भौगोलिक संरचना दोनों पर प्रकाश डालता है?
सही उत्तर: (B)
व्याख्या: बिजोलिया शिलालेख (1170 ई.) चौहान वंश के इतिहास का एक अत्यंत प्रामाणिक स्रोत है। इस शिलालेख के अनुसार, राजस्थान की सबसे बड़ी खारे पानी की सांभर झील (जो जयपुर, नागौर, डीडवाना-कुचामन और अजमेर जिलों की सीमाओं पर स्थित है) का निर्माण चौहान शासक 'वासुदेव' ने करवाया था। इसी अभिलेख में चौहानों को 'वत्स गोत्र' का ब्राह्मण बताया गया है।
प्र. 83: राजस्थान में आदिवासी व भील समुदायों के सामाजिक उत्थान एवं उनके सैन्य संगठनों के संदर्भ में (मई 2026 के अद्यतन परिप्रेक्ष्य में) कौन से समूह पूर्णतः सत्य हैं?
1. गोविन्द गुरु — इन्होंने भीलों में राजनीतिक व सांस्कृतिक चेतना जागृत करने हेतु 1883 ई. में 'सम्प सभा' की स्थापना की (मानगढ़ पहाड़ी विद्रोह 1913)। 2. मोतीलाल तेजावत — इन्होंने 1921 ई. में मातृकुण्डिया से 'एकी आन्दोलन' (भौमट भील आन्दोलन) की शुरुआत की, जिसका उद्देश्य भारी लगान और बेगार से मुक्ति था। 3. मीणा क्षेत्रीय सभा — इस संस्था की स्थापना 1933 ई. में की गई थी, जिसने जयपुर सरकार से 'जरायम पेशा कानून' को समाप्त करने की कड़ी माँग रखी थी। 4. मेवाड़ भील कोर (MBC) — आदिवासियों पर नियंत्रण व सुरक्षा हेतु 1 जनवरी 1841 ई. को कर्नल जेम्स आउट्रम के प्रस्ताव पर इस सैन्य टुकड़ी की स्थापना की गई थी।
सही कूट का चयन कीजिए:
सही उत्तर: (D)
व्याख्या: दिए गए चारों समूह ऐतिहासिक दस्तावेजों के आधार पर पूर्णतः सत्य हैं। गोविन्द गुरु ने 1883 में सम्प सभा बनाई। मोतीलाल तेजावत ने 1921 में एकी आन्दोलन (भौमट आन्दोलन) चलाया। मीणा क्षेत्रीय सभा 1933 में बनी जिसने जरायम पेशा कानून का विरोध किया। मेवाड़ भील कोर (MBC) की स्थापना 1 जनवरी 1841 को जेम्स आउट्रम के प्रस्ताव पर हुई थी, जिसका मुख्यालय खेरवाड़ा था।
प्र. 84: नीचे दो कथन दिए गए हैं, एक को अभिकथन (A) और दूसरे को कारण (R) के रूप में दर्शाया गया है:
अभिकथन (A): मारवाड़ के प्रतापी शासक राव चन्द्रसेन को राजपूताना के इतिहास में 'मारवाड़ का प्रताप' और 'महाराणा प्रताप का पथ-प्रदर्शक' (अग्रगामी) कहा जाता है। कारण (R): राव चन्द्रसेन ने मुगल सम्राट अकबर की अधीनता स्वीकार करने के बजाय, आजीवन पहाड़ों व जंगलों में भटककर छापामार युद्ध पद्धति से मुगलों के खिलाफ स्वतंत्रता का निरंतर संघर्ष जारी रखा और कभी घुटने नहीं टेके।
उपर्युक्त कथनों के संदर्भ में सही कूट का चयन कीजिए:
सही उत्तर: (A)
व्याख्या: अभिकथन (A) और कारण (R) दोनों पूर्णतः सत्य हैं। जिस प्रकार मेवाड़ में महाराणा प्रताप ने मुगलों की अधीनता स्वीकार नहीं की, उसी प्रकार उनसे भी पूर्व मारवाड़ में राव चन्द्रसेन ने 1570 के नागौर दरबार के बाद अकबर का विरोध किया और आजीवन संघर्ष किया। इसी कारण (R) उन्हें प्रताप का अग्रगामी या पथ-प्रदर्शक (A) कहा जाता है। अतः कारण, अभिकथन की बिल्कुल सटीक व्याख्या करता है।
प्र. 85: राजपूताना की विभिन्न रियासतों के ऐतिहासिक अभिलेखीय रिकॉर्ड शृंखलाओं (बहियों) एवं उनकी विषयवस्तु का कौन सा युग्म सुमेलित नहीं है?
सही उत्तर: (D)
व्याख्या: विकल्प (D) सुमेलित नहीं है। कर्मचारियों के पदों (ओहदों) और नियुक्तियों का विवरण मारवाड़ रियासत की 'ओहदा बही' में रखा जाता था। जबकि 'बाजे-तालिके' अभिलेख शृंखला 'किशनगढ़' रियासत की प्रशासनिक एवं कर व्यवस्था की प्रामाणिक जानकारी प्रदान करती है, मारवाड़ की नहीं। अन्य सभी विकल्प (हकीकत बही, कागद बही, अड़सट्टा) पूर्णतः सुमेलित हैं।
🏷️ [RPSC Sr. Teacher Gr-II 2018] [RPSC School Lect. (SE) 2022] [RPSC Assistant Professor 2021] [RPSC Archivist 2024]
प्र. 86: राजपूताना के प्रख्यात ऐतिहासिक व साहित्यिक ग्रंथों (सूची-I) का उनके रचयिताओं (सूची-II) के साथ सही मिलान कीजिए:
व्याख्या: (A) 'वंश भास्कर' बूंदी के महाराव रामसिंह के दरबारी कवि सूर्यमल्ल मीसण द्वारा रचित है। (B) 'कान्हड़दे प्रबन्ध' जालौर के शासक कान्हड़देव और अलाउद्दीन खिलजी के संघर्ष का वर्णन करता है, जिसे पद्मनाभ ने लिखा है। (C) 'पृथ्वीराज रासो' चंदबरदाई की प्रसिद्ध रचना है। (D) 'मारवाड़ रा परगना री विगत' को 'मारवाड़ का गजेटियर' कहा जाता है, जिसे जोधपुर के दीवान मुहणौत नैणसी ने लिखा था।
प्र. 87: 1857 की क्रांति के दौरान राजपूताना की विभिन्न सैनिक छावनियों में हुए विद्रोह के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
I. नसीराबाद छावनी में 28 मई 1857 को 15वीं बंगाल नेटिव इन्फेंट्री के सैनिकों ने विद्रोह कर क्रांति का सूत्रपात किया। II. नीमच छावनी में 3 जून 1857 को मोहम्मद अली बेग और हीरा सिंह के नेतृत्व में सैनिकों ने विद्रोह किया। III. एरिनपुरा छावनी के सैनिकों (जोधपुर लीजियन) ने 21 अगस्त 1857 को विद्रोह किया और 'चलो दिल्ली, मारो फिरंगी' का नारा दिया। IV. कोटा में 15 अक्टूबर 1857 को मेहराब खान और लाला जयदयाल के नेतृत्व में जन-विद्रोह हुआ, जिसे बाद में मेजर जनरल रॉबर्ट्स ने कुचला।
उपर्युक्त में से कौन से कथन पूर्णतः सत्य हैं?
सही उत्तर: (D)
व्याख्या: दिए गए चारों कथन 1857 की क्रांति के घटनाक्रम के अनुसार पूर्णतः सत्य हैं। राजस्थान में क्रांति की शुरुआत 28 मई को नसीराबाद से हुई। 3 जून को नीमच में मोहम्मद अली बेग के नेतृत्व में विद्रोह हुआ। एरिनपुरा में 'चलो दिल्ली, मारो फिरंगी' का नारा शिवनाथ सिंह के नेतृत्व में दिया गया। कोटा में सबसे सुनियोजित और भीषण जन-विद्रोह हुआ, जिसे मार्च 1858 में मेजर जनरल रॉबर्ट्स ने दबाया था।
प्र. 88: राजस्थान में कृषक असंतोष और शोषण के विरुद्ध चलाए गए निम्नलिखित प्रमुख किसान आन्दोलनों को उनके प्रारम्भ होने के सही कालक्रमानुसार (प्राचीन से नवीन क्रम में) व्यवस्थित कीजिए:
1. बिजोलिया किसान आन्दोलन 2. बेंगू किसान आन्दोलन 3. नीमूचाणा (अलवर) किसान आन्दोलन 4. डाबड़ा (नागौर) किसान आन्दोलन
सही कूट का चयन कीजिए:
सही उत्तर: (B)
व्याख्या: किसान आन्दोलनों का सही कालक्रम: 1. बिजोलिया किसान आन्दोलन (1897 ई. में साधु सीताराम दास के नेतृत्व में प्रारम्भ)। 2. बेंगू किसान आन्दोलन (1921 ई. में रामनारायण चौधरी के नेतृत्व में प्रारम्भ)। 3. नीमूचाणा किसान आन्दोलन (1925 ई. में अलवर के राजपूत किसानों द्वारा)। 4. डाबड़ा काण्ड (13 मार्च 1947 ई. को डीडवाना, नागौर में)। अतः सही क्रम 1, 2, 3, 4 है।
🏷️ [RPSC Sub Inspector 2021] [RPSC RAS/RTS Pre 2013] [RPSC Sr. Teacher Gr-II 2011]
प्र. 89: राजपूताना के प्रतापी शासकों और उनके द्वारा निर्मित ऐतिहासिक दुर्गों/स्थापत्य कला के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन सा कथन असत्य है?
सही उत्तर: (D)
व्याख्या: कथन (D) असत्य है। बीकानेर के 'जूनागढ़ दुर्ग' का निर्माण महाराजा रायसिंह ने अपने मंत्री कर्मचंद की देखरेख में 1589-1594 ई. के मध्य करवाया था। जाट महाराजा सूरजमल ने भरतपुर में अजेय 'लोहागढ़ दुर्ग' का निर्माण करवाया था। अन्य सभी कथन (कुम्भा द्वारा 32 दुर्ग, जोधा द्वारा मेहरानगढ़ 1459, सवाई जयसिंह की 5 वेधशालाएँ) ऐतिहासिक दृष्टि से पूर्णतः सत्य हैं।
प्र. 90: नीचे दो कथन दिए गए हैं, एक को अभिकथन (A) और दूसरे को कारण (R) के रूप में दर्शाया गया है:
अभिकथन (A): मुगल सम्राट अकबर ने मेवाड़ के महाराणा प्रताप को अधीनता स्वीकार करवाने हेतु क्रमशः जलाल खाँ कोरची, मानसिंह, भगवानदास और टोडरमल के नेतृत्व में चार कूटनीतिक शिष्टमंडल भेजे। कारण (R): अकबर बिना किसी रक्तपात के मेवाड़ को अपने साम्राज्य का हिस्सा बनाना चाहता था, परन्तु महाराणा प्रताप ने अपनी स्वतंत्रता और स्वाभिमान से समझौता करने से इनकार कर दिया, जिसके परिणामस्वरूप 1576 ई. का हल्दीघाटी का युद्ध अनिवार्य हो गया।
उपर्युक्त कथनों के संदर्भ में सही कूट का चयन कीजिए:
सही उत्तर: (A)
व्याख्या: अभिकथन (A) और कारण (R) दोनों पूर्णतः सत्य हैं। अकबर की कूटनीति (शिष्टाचार) का मुख्य उद्देश्य बिना युद्ध के प्रताप को अधीन करना था। उसने 1572 से 1573 के मध्य चार शिष्टमंडल (जमाभटो - जलाल खाँ, मानसिंह, भगवानदास, टोडरमल) भेजे। प्रताप की अटूट स्वतंत्रता की भावना और इन कूटनीतिक वार्ताओं की विफलता (कारण R) ने ही हल्दीघाटी के युद्ध (18 जून 1576) की पृष्ठभूमि तैयार की। अतः कारण, अभिकथन की सही व्याख्या करता है।
प्र. 91: राजस्थान में किसान आन्दोलनों को राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति दिलाने वाले उस प्रख्यात क्रांतिकारी को पहचानिए, जिनके विवरण नीचे दिए गए हैं:
• इनका जन्म 1882 ई. में उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले के गुठावली गाँव में हुआ था और इनका मूल नाम 'भूप सिंह गुर्जर' था। • इन्होंने 1916 ई. में 'विद्या प्रचारिणी सभा' के माध्यम से बिजोलिया आन्दोलन का नेतृत्व संभाला। • इन्होंने 1919 ई. में वर्धा में 'राजस्थान सेवा संघ' की स्थापना की और 'नवीन राजस्थान' व 'राजस्थान केसरी' समाचार पत्रों का प्रकाशन किया।
सही उत्तर: (B)
व्याख्या: यह विवरण राजस्थान में 'किसान आन्दोलनों के जनक' विजय सिंह पथिक का है। इनका मूल नाम भूप सिंह था और वे रासबिहारी बोस के सशस्त्र क्रांति योजना के तहत राजस्थान आए थे। बाद में छद्म नाम (विजय सिंह पथिक) धारण कर इन्होंने बिजोलिया आन्दोलन को राष्ट्रीय पहचान दिलाई और 'राजस्थान सेवा संघ' (1919) की स्थापना की।
प्र. 92: राजस्थान में स्वतंत्रता संग्राम के दौरान जन-जागृति लाने वाले प्रमुख समाचार-पत्रों व उनके संपादकों/प्रकाशन स्थलों का कौन सा समूह पूर्णतः सत्य है?
1. प्रताप — गणेश शंकर विद्यार्थी (कानपुर से प्रकाशित, जिसने बिजोलिया आन्दोलन को राष्ट्रीय ख्याति दिलाई)। 2. राजस्थान केसरी — विजय सिंह पथिक (1920 ई. में वर्धा से प्रकाशित, रामनारायण चौधरी इसके सह-संपादक थे)। 3. नवीन राजस्थान — राजस्थान सेवा संघ (1922 ई. में अजमेर से प्रकाशित, बाद में इसे 'तरुण राजस्थान' कर दिया गया)। 4. आगीवाण — जयनारायण व्यास (1932 ई. में ब्यावर से प्रकाशित, राजस्थानी भाषा का प्रथम राजनीतिक समाचार-पत्र)।
सही कूट का चयन कीजिए:
सही उत्तर: (D)
व्याख्या: दिए गए चारों समूह ऐतिहासिक दस्तावेजों के आधार पर पूर्णतः सत्य हैं। 'प्रताप' अखबार (कानपुर) ने बिजोलिया की खबरें छापीं। 'राजस्थान केसरी' वर्धा से पथिक जी ने निकाला। 'नवीन राजस्थान' 1922 में अजमेर से निकला जिस पर प्रतिबंध लगने के बाद यह 'तरुण राजस्थान' कहलाया। 'आगीवाण' 1932 में ब्यावर से जयनारायण व्यास द्वारा राजस्थानी भाषा में निकाला गया पहला राजनीतिक पत्र था।
🏷️ [RPSC Assistant Professor 2021] [RPSC School Lect. (SE) 2022] [RPSC A.P. Lib. PTI (CE) 2023]
प्र. 93: राजस्थान की प्राचीन सभ्यताओं (मई 2026 के नवीनतम 41 जिलों की प्रशासनिक रूपरेखा के परिप्रेक्ष्य में) एवं उनकी वर्तमान अवस्थिति का कौन सा युग्म सुमेलित नहीं है?
सही उत्तर: (B)
व्याख्या: विकल्प (B) सुमेलित नहीं है। मई 2026 की नवीन जिला रूपरेखा के अनुसार, बैराठ (विराटनगर) सभ्यता अब जयपुर शहर या जयपुर ग्रामीण में नहीं, बल्कि नवनिर्मित 'कोटपूतली-बहरोड़' जिले के अंतर्गत आती है। इसी प्रकार गणेश्वर सभ्यता जो पहले सीकर में थी, अब 'नीम का थाना' जिले में है। कालीबंगा हनुमानगढ़ में और आहड़ उदयपुर में ही स्थित हैं।
प्र. 94: राजपूताना के प्रमुख ऐतिहासिक शासकों (सूची-I) का उनके समकालीन मुगल/सल्तनत शासकों (सूची-II) के साथ सही मिलान कीजिए, जिनसे उनका भीषण संघर्ष हुआ था:
व्याख्या: (A) महाराणा सांगा का अंतिम और निर्णायक संघर्ष (खानवा का युद्ध, 1527) मुगल शासक 'बाबर' के साथ हुआ। (B) महाराणा प्रताप ने जीवन भर मुगल सम्राट 'अकबर' (हल्दीघाटी 1576) के विरुद्ध संघर्ष किया। (C) मारवाड़ के राव मालदेव का 'गिरी-सुमेल' (1544) में अफगान शासक 'शेरशाह सूरी' से संघर्ष हुआ। (D) रणथम्भौर के हम्मीर देव चौहान का 1301 ई. में दिल्ली सुल्तान 'अलाउद्दीन खिलजी' के साथ भीषण युद्ध हुआ।
प्र. 95: राजस्थान में आदिवासी, भील और मीणा समुदायों द्वारा चलाए गए सामाजिक और राजनीतिक आन्दोलनों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
I. 1883 ई. में गोविन्द गुरु द्वारा स्थापित 'सम्प सभा' का प्रथम अधिवेशन 1903 ई. में मानगढ़ पहाड़ी पर हुआ था। II. 17 नवम्बर 1913 को मानगढ़ पहाड़ी पर ब्रिटिश सेना द्वारा की गई गोलाबारी में लगभग 1500 भील शहीद हुए, जिसे 'राजस्थान का जलियांवाला बाग' कहा जाता है। III. मोतीलाल तेजावत ने 1921 में 'एकी आन्दोलन' मातृकुण्डिया (चित्तौड़गढ़) से प्रारम्भ किया, जिसमें उन्होंने 21 सूत्री मांग-पत्र 'मेवाड़ की पुकार' महाराणा को सौंपा। IV. 1933 ई. में जयपुर राज्य में 'मीणा क्षेत्रीय महासभा' का गठन किया गया, जिसका मुख्य उद्देश्य 'जरायम पेशा कानून' (क्रिमिनल ट्राइब्स एक्ट) का विरोध करना था।
उपर्युक्त में से कौन से कथन सही हैं?
सही उत्तर: (D)
व्याख्या: दिए गए चारों कथन ऐतिहासिक दस्तावेजों के आधार पर पूर्णतः सत्य हैं। गोविन्द गुरु ने सम्प सभा (1883) बनाई जिसका अधिवेशन मानगढ़ पहाड़ी पर होता था। 17 नवम्बर 1913 को मानगढ़ नरसंहार हुआ। मोतीलाल तेजावत (बावजी) ने 1921 में एकी आन्दोलन चलाया और 'मेवाड़ की पुकार' नामक 21 सूत्री मांग पत्र तैयार किया। मीणा समुदाय ने जरायम पेशा कानून (1924) और जयराम पेशा कानून (1930) के विरोध में 1933 में 'मीणा क्षेत्रीय महासभा' का गठन किया था।
🏷️ [RPSC RAS/RTS Pre 2018] [RPSC Assistant Archivist 2024]
प्र. 96: नीचे दो कथन दिए गए हैं, एक को अभिकथन (A) और दूसरे को कारण (R) के रूप में दर्शाया गया है:
अभिकथन (A): मुगल सम्राट अकबर ने राजपूताना के शासकों के प्रति सुलहकुल (शांति एवं मित्रता) और वैवाहिक संबंधों की नीति अपनाई, जिसके तहत भारमल (आमेर) ने सर्वप्रथम 1562 ई. में अपनी पुत्री का विवाह अकबर से किया। कारण (R): अकबर एक दूरदर्शी शासक था और वह भली-भांति जानता था कि राजपूताने के वीर योद्धाओं के सक्रिय सहयोग और समर्थन के बिना भारत में एक स्थायी और सुदृढ़ मुगल साम्राज्य की स्थापना करना असंभव है।
उपर्युक्त कथनों के संदर्भ में सही कूट का चयन कीजिए:
सही उत्तर: (A)
व्याख्या: अभिकथन (A) और कारण (R) दोनों पूर्णतः सत्य हैं। अकबर की 'राजपूत नीति' दमन और मित्रता का मिश्रण थी। उसने 1562 में आमेर के भारमल से वैवाहिक संबंध स्थापित किए। इस नीति का मूल कारण (R) यह था कि अकबर भारत की बहुसंख्यक जनता पर शासन करने के लिए राजपूतों की अदम्य वीरता, स्वामीभक्ति और स्थानीय प्रभाव का लाभ उठाना चाहता था, ताकि मुगल साम्राज्य सुदृढ़ हो सके। अतः कारण, अभिकथन की सटीक व्याख्या करता है।
🏷️ [RPSC Sr. Teacher Gr II S.E. (G-B) 2022 Re-Exam] [RPSC RAS/RTS Pre 2013]
प्र. 97: राजपूताना के इतिहास की दिशा बदलने वाले निम्नलिखित ऐतिहासिक युद्धों को उनके घटित होने के सही कालक्रमानुसार (प्राचीन से नवीन क्रम में) व्यवस्थित कीजिए:
1. तराइन का प्रथम युद्ध (पृथ्वीराज चौहान व मुहम्मद गोरी) 2. रणथम्भौर का युद्ध (हम्मीर देव चौहान व अलाउद्दीन खिलजी) 3. चित्तौड़ का प्रथम साका (रावल रतन सिंह व अलाउद्दीन खिलजी) 4. जालौर का युद्ध (कान्हड़देव चौहान व अलाउद्दीन खिलजी)
सही कूट का चयन कीजिए:
सही उत्तर: (C)
व्याख्या: युद्धों का ऐतिहासिक कालक्रम इस प्रकार है: 1. तराइन का प्रथम युद्ध - 1191 ई. (पृथ्वीराज चौहान तृतीय विजयी रहे)। 2. रणथम्भौर का युद्ध (प्रथम साका) - 1301 ई. (हम्मीर देव और अलाउद्दीन खिलजी)। 3. चित्तौड़ का प्रथम साका - 1303 ई. (रावल रतन सिंह और रानी पद्मिनी का जौहर)। 4. जालौर का युद्ध (साका) - 1311 ई. (कान्हड़देव चौहान और खिलजी)। अतः सही क्रम 1, 2, 3, 4 है।
🏷️ [RPSC Asst. Town Planner-2022] [RPSC RAS/RTS Pre 2009] [RPSC School Lect. (Group-D) 2022]
प्र. 98: राजस्थान के एकीकरण एवं उसकी प्रशासनिक व्यवस्थाओं के निर्धारण हेतु गठित विभिन्न समितियों/आयोगों के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन सा कथन असत्य है?
सही उत्तर: (D)
व्याख्या: कथन (D) असत्य है। 15 मई 1949 को मत्स्य संघ का वृहत्तर राजस्थान में विलय 'डॉ. शंकर राव देव समिति' की सिफारिश पर किया गया था, न कि के. एम. मुंशी की सिफारिश पर। के. एम. मुंशी ने केवल एकीकरण के प्रथम चरण का नाम 'मत्स्य संघ' रखने का सुझाव दिया था। अन्य सभी कथन (पी. सत्यनारायण राव समिति, शंकर राव देव समिति का उद्देश्य, और फजल अली आयोग) ऐतिहासिक रूप से पूर्णतः सत्य हैं।
🏷️ [RPSC Research Scholar 2024] [RPSC Deputy Commandant 2020]
प्र. 99: राजपूताना के इतिहास में अपने अद्वितीय त्याग और स्वामीभक्ति के लिए अमर उस वीरांगना को पहचानिए, जिसके विवरण नीचे दिए गए हैं:
• ये मेवाड़ के महाराणा संग्राम सिंह (सांगा) के पुत्र उदय सिंह की धाय माँ (Foster Mother) थीं। • जब दासी पुत्र बनवीर ने महाराणा विक्रमादित्य की हत्या कर दी और उदय सिंह को मारने आया, तो इन्होंने अपने सगे पुत्र को उदय सिंह की शय्या पर सुला दिया। • इन्होंने अपने पुत्र का बलिदान देकर मेवाड़ के कुलदीपक (उदय सिंह) की प्राण रक्षा की और उन्हें सुरक्षित कुंभलगढ़ दुर्ग पहुँचाया।
सही उत्तर: (B)
व्याख्या: यह विवरण मेवाड़ की अद्वितीय वीरांगना 'पन्ना धाय' का है। 1536 ई. में जब दासी पुत्र बनवीर ने मेवाड़ की सत्ता हथियाने के लिए विक्रमादित्य की हत्या की, तब पन्ना धाय ने अपने पुत्र 'चंदन' का बलिदान देकर उदय सिंह की जान बचाई थी और कीरत बारी की सहायता से उन्हें कुंभलगढ़ (आशा देवपुरा के पास) सुरक्षित पहुँचाया था। मारवाड़ की 'गोरा धाय' ने अजीत सिंह की रक्षा की थी।
🏷️ [RPSC Sub Inspector 14/09/2021] [RPSC RAS/RTS Pre 2006-07] [RPSC LDC (P-I) 2011]
प्र. 100: राजस्थान की भौगोलिक-ऐतिहासिक विरासत के अंतर्गत राज्य के प्रमुख अभेद्य दुर्गों (सूची-I) का उनके निर्माण से संबंधित विशिष्ट पहाड़ियों/नदियों के संगम (सूची-II) के साथ सही मिलान कीजिए:
सूची-II (पहाड़ी/भौगोलिक स्थिति) 1. चिड़िया-टूँक पहाड़ी 2. मेसा का पठार (गंभीरी व बेड़च नदी के संगम के पास) 3. सुवर्णगिरी (कांचनगिरी) पहाड़ी 4. आहू और कालीसिंध नदियों के संगम (सामेला) पर
कूट:
सही उत्तर: (A)
व्याख्या: (A) राजस्थान का गौरव 'चित्तौड़गढ़ दुर्ग' मेसा के पठार पर स्थित है, जिसके समीप गंभीरी और बेड़च नदियाँ बहती हैं। (B) 'मेहरानगढ़ दुर्ग' राव जोधा द्वारा चिड़िया-टूँक (पंचेटिया) पहाड़ी पर बनाया गया। (C) 'गागरोन दुर्ग' (जल दुर्ग का सर्वश्रेष्ठ उदाहरण) आहू और कालीसिंध नदियों के संगम (सामेला) पर स्थित है। (D) 'जालौर दुर्ग' सुकड़ी नदी के किनारे सुवर्णगिरी या कांचनगिरी पहाड़ी पर स्थित है।
🏷️ [RPSC School Lect. (SE) 2022] [RPSC Assistant Professor 2021] [RPSC LDC (P-I) 2011]
प्र. 101: राजस्थान की प्राचीन सभ्यताओं (सूची-I) का उनके उत्खनन स्थलों की वर्तमान (मई 2026 की 41 जिलों की प्रशासनिक व्यवस्था के अनुसार) अवस्थिति एवं संबंधित नदियों (सूची-II) के साथ सही मिलान कीजिए:
सूची-II (वर्तमान जिला व नदी) 1. नीम का थाना (कान्तली नदी के समीप) 2. राजसमंद (बनास नदी के किनारे) 3. ब्यावर (खारी नदी के किनारे) 4. भीलवाड़ा (कोठारी नदी के किनारे)
कूट:
सही उत्तर: (A)
व्याख्या: मई 2026 के अद्यतन प्रशासनिक विभाजन के अनुसार: (A) ओझियाना सभ्यता पूर्व में भीलवाड़ा में थी, परन्तु अब यह 'ब्यावर' जिले में खारी नदी के पास स्थित है। (B) सुनारी सभ्यता (लौह युगीन) पूर्व में झुंझुनूं में थी, जो अब 'नीम का थाना' जिले में कान्तली नदी क्षेत्र में है। (C) बागोर सभ्यता भीलवाड़ा में कोठारी नदी के किनारे है (वी.एन. मिश्रा द्वारा उत्खनन)। (D) गिलूण्ड सभ्यता राजसमंद जिले में बनास नदी के किनारे स्थित है।
प्र. 102: आमेर (जयपुर) के कछवाहा राजवंश के प्रतापी शासकों और उनके ऐतिहासिक योगदान के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन सा कथन असत्य है?
सही उत्तर: (D)
व्याख्या: कथन (D) असत्य है। सवाई ईश्वरी सिंह ने मराठों के दबाव और अपने सेनापति हरगोविंद नटानी के विश्वासघात के कारण 1750 ई. में आत्महत्या की थी, परन्तु उन्होंने कुतुबमीनार से नहीं, बल्कि जयपुर में स्वयं द्वारा निर्मित 'ईसरलाट' (सरगासूली) से कूदकर अपने प्राण त्यागे थे। अन्य सभी कथन (पुरन्दर की संधि 1665, हुरड़ा सम्मेलन 1734, और हवामहल 1799) ऐतिहासिक दृष्टि से पूर्णतः सत्य हैं।
प्र. 103: राजस्थान में स्वतंत्रता संग्राम और सामाजिक सुधारों में अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाली प्रमुख महिला नेत्रियों के संदर्भ में कौन से कथन सत्य हैं?
1. जानकी देवी बजाज — इन्होंने 1933 ई. में कलकत्ता में आयोजित 'अखिल भारतीय मारवाड़ी महिला सम्मेलन' की ऐतिहासिक अध्यक्षता की थी। 2. अंजना देवी चौधरी — रामनारायण चौधरी की पत्नी, जो बिजोलिया और बेंगू किसान आन्दोलनों में गिरफ्तार होने वाली राजपूताना की प्रथम महिला थीं। 3. रतन शास्त्री — हीरालाल शास्त्री की पत्नी, जिन्होंने 1935 ई. में निवाई (टोंक) में 'शांताबाई शिक्षा कुटीर' (वर्तमान वनस्थली विद्यापीठ) की स्थापना में महती भूमिका निभाई। 4. नारायणी देवी वर्मा — माणिक्य लाल वर्मा की पत्नी, जिन्होंने 1944 ई. में भीलवाड़ा में 'महिला आश्रम' की स्थापना की।
सही कूट का चयन कीजिए:
सही उत्तर: (D)
व्याख्या: दिए गए चारों समूह पूर्णतः सत्य हैं। जानकी देवी बजाज ने 1933 में कलकत्ता मारवाड़ी महिला सम्मेलन की अध्यक्षता की। अंजना देवी चौधरी रियासती जनता में गिरफ्तार होने वाली पहली महिला थीं। रतन शास्त्री को पद्म श्री और पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था तथा उन्होंने वनस्थली विद्यापीठ की नींव रखी। नारायणी देवी वर्मा ने मेवाड़ प्रजामण्डल में भाग लिया और भीलवाड़ा में महिला आश्रम बनाया।
🏷️ [RPSC Sub Inspector 2021] [RPSC RAS/RTS Pre 2013] [RPSC Sr. Teacher Gr-II (G-I) 2016]
प्र. 104: राजपूताना के इतिहास को कूटनीतिक रूप से प्रभावित करने वाली निम्नलिखित प्रमुख संधियों/समझौतों को उनके संपन्न होने के सही कालक्रमानुसार (प्राचीन से नवीन क्रम में) व्यवस्थित कीजिए:
1. देबारी समझौता (मेवाड़, मारवाड़ व आमेर के मध्य) 2. पुरन्दर की संधि (मिर्ज़ा राजा जयसिंह व शिवाजी) 3. ईस्ट इंडिया कंपनी के साथ सहायक/आश्रित पार्थक्य की संधियाँ 4. हुरड़ा सम्मेलन (मराठों के विरुद्ध राजपूत शासकों का संघ)
सही कूट का चयन कीजिए:
सही उत्तर: (A)
व्याख्या: इन ऐतिहासिक संधियों/समझौतों का सही कालक्रम: 1. पुरन्दर की संधि - 11 जून 1665 ई.। 2. देबारी समझौता - 1708 ई. (महाराणा अमरसिंह द्वितीय, सवाई जयसिंह और अजीत सिंह के मध्य)। 3. हुरड़ा सम्मेलन - 17 जुलाई 1734 ई. (सवाई जयसिंह के प्रयासों से)। 4. ईस्ट इंडिया कंपनी के साथ संधियाँ - 1817-18 ई. (चार्ल्स मेटकाफ के प्रयासों से)। अतः सही क्रम 2, 1, 4, 3 है।
प्र. 105: नीचे दो कथन दिए गए हैं, एक को अभिकथन (A) और दूसरे को कारण (R) के रूप में दर्शाया गया है:
अभिकथन (A): 1857 के विप्लव के दौरान बीकानेर के महाराजा सरदार सिंह राजपूताना के एकमात्र ऐसे शासक थे, जिन्होंने विद्रोहियों के दमन हेतु अपनी सेना राज्य की सीमाओं से बाहर (पंजाब के बाड़लू, हिसार आदि क्षेत्रों तक) भेजी थी। कारण (R): महाराजा सरदार सिंह अपनी इस अत्यधिक स्वामीभक्ति के माध्यम से ब्रिटिश सरकार को प्रसन्न कर अपनी रियासत का विस्तार करना चाहते थे, जिसके परिणामस्वरूप खुश होकर अंग्रेजों ने उन्हें 'टिब्बी परगने' के 41 गाँव उपहार स्वरूप प्रदान किए।
उपर्युक्त कथनों के संदर्भ में सही कूट का चयन कीजिए:
सही उत्तर: (A)
व्याख्या: अभिकथन (A) पूर्णतः सत्य है कि महाराजा सरदार सिंह ने राज्य के बाहर जाकर (हिसार, हांसी, सिरसा) अंग्रेजों की सहायता की। कारण (R) भी सत्य है, अंग्रेजों ने उनकी इस अद्वितीय सहायता के बदले उन्हें टिब्बी परगने (वर्तमान हनुमानगढ़ क्षेत्र) के 41 गाँव दिए थे। शासक का मुख्य उद्देश्य ब्रिटिश साम्राज्य की सहानुभूति और क्षेत्रीय लाभ प्राप्त करना था, अतः कारण (R), अभिकथन (A) की सही और तार्किक व्याख्या करता है।
प्र. 106: राजस्थान की प्राचीन व मध्यकालीन साहित्य संपदा और उनके रचयिताओं के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन सा युग्म सुमेलित नहीं है?
सही उत्तर: (C)
व्याख्या: विकल्प (C) सुमेलित नहीं है। आठवीं शताब्दी में जालौर दुर्ग (गुर्जर-प्रतिहार शासक वत्सराज के समय) में रचित प्रसिद्ध ग्रंथ 'कुवलयमाला' के रचयिता 'उद्योतन सूरी' हैं, न कि हेमचन्द्र सूरी। इसमें 18 देशी भाषाओं का उल्लेख है जिसमें मरुभाषा (राजस्थानी) भी शामिल है। हेमचन्द्र सूरी ने 'देशीनाममाला' व 'कुमारपाल चरित' की रचना की थी। अन्य सभी विकल्प पूर्णतः सुमेलित हैं।
🏷️ [RPSC Head Master Prav. (San. Edu) 2021 Paper-I] [RPSC Research Scholar 2024]
प्र. 107: राजस्थान के किसान आन्दोलनों के इतिहास में उस प्रमुख किसान नेता को पहचानिए, जिनके विवरण नीचे दिए गए हैं:
• इन्होंने बीकानेर रियासत में जागीरदारों के अत्याचारों और बेगार प्रथा के विरुद्ध किसानों को संगठित किया। • इन्होंने रियासत द्वारा लगाए गए 'आबियाना' (नहरी पानी कर) का कड़ा विरोध किया। • इन्होंने 'किसान यूनियन क्यों?' नामक प्रसिद्ध पुस्तिका लिखी और बीकानेर प्रजा परिषद् के बैनर तले महाजन, उदासर और कांगड़ काण्ड (1946) के दौरान किसानों का नेतृत्व किया।
सही उत्तर: (A)
व्याख्या: यह विवरण बीकानेर रियासत के प्रमुख किसान नेता 'कुम्भाराम आर्य' का है। उन्होंने बीकानेर क्षेत्र में किसानों को संगठित किया, 'आबियाना' कर (पानी पर टैक्स) का विरोध किया और अपनी पुस्तक 'किसान यूनियन क्यों?' के माध्यम से किसान अधिकारों के प्रति भारी जन-जागृति पैदा की। मघाराम वैद्य ने बीकानेर प्रजामण्डल की स्थापना कलकत्ता में की थी।
प्र. 108: राजस्थान की दुर्ग स्थापत्य कला (मई 2026 के नवीन जिलों के परिप्रेक्ष्य में) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
I. कुम्भलगढ़ दुर्ग (राजसमंद) की प्राचीर लगभग 36 किलोमीटर लंबी है, जिसके प्रमुख वास्तुकार 'मण्डन' थे। II. तारागढ़ दुर्ग (बूँदी) अपने उत्कृष्ट 'भित्ति चित्रों' (Fresco Paintings) और चित्रशाला के लिए संपूर्ण राजपूताना में विख्यात है। III. जूनागढ़ दुर्ग (बीकानेर) के मुख्य प्रवेश द्वार 'सूरज पोल' पर चित्तौड़ के वीर रक्षकों 'जयमल और फत्ता' की गजारूढ़ मूर्तियां स्थापित हैं। IV. गागरोन दुर्ग (झालावाड़) 'जल दुर्ग' (औदक दुर्ग) का सर्वश्रेष्ठ उदाहरण है, जो आहू और कालीसिंध नदियों के संगम (सामेला) पर बिना किसी नींव के चट्टान पर खड़ा है।
उपर्युक्त में से कौन से कथन सही हैं?
सही उत्तर: (D)
व्याख्या: दिए गए चारों कथन दुर्ग स्थापत्य कला के संदर्भ में पूर्णतः सत्य हैं। कुम्भलगढ़ की दीवार भारत की महान दीवार (Great Wall of India) कहलाती है। बूँदी का तारागढ़ भित्ति चित्रों हेतु प्रसिद्ध है। जूनागढ़ (बीकानेर) का निर्माण रायसिंह ने करवाया, जहाँ जयमल-फत्ता की मूर्तियाँ हैं (जिन्हें पहले अकबर ने आगरा के किले पर लगवाया था)। गागरोन दुर्ग जल दुर्ग की श्रेणी में आता है।
प्र. 109: राजस्थान के एकीकरण के विभिन्न चरणों एवं उनमें नवगठित संघों के राजप्रमुखों का निम्नलिखित में से कौन सा मिलान पूर्णतः सही है?
(A) मत्स्य संघ — महाराव भीम सिंह (कोटा) (B) पूर्व राजस्थान (राजस्थान संघ) — उदयभान सिंह (धौलपुर) (C) संयुक्त राजस्थान — महाराणा भूपाल सिंह (उदयपुर) (D) वृहद् राजस्थान — महाराजा सवाई मानसिंह द्वितीय (जयपुर)
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:
सही उत्तर: (B)
व्याख्या: (A) और (B) का मिलान गलत (विपरीत) है। प्रथम चरण 'मत्स्य संघ' के राजप्रमुख धौलपुर के महाराजा उदयभान सिंह थे। द्वितीय चरण 'पूर्व राजस्थान' के राजप्रमुख कोटा के महाराव भीम सिंह थे। तृतीय चरण 'संयुक्त राजस्थान' के राजप्रमुख उदयपुर के महाराणा भूपाल सिंह बने और चतुर्थ चरण 'वृहद् राजस्थान' (तथा आगे के चरणों) में जयपुर के सवाई मानसिंह द्वितीय को राजप्रमुख (आजीवन) बनाया गया था। अतः केवल (C) और (D) सही हैं।
🏷️ [RPSC LDC (P-I) 2011] [RPSC RAS/RTS Pre 1996] [RPSC Research Scholar 2024]
प्र. 110: मध्यकालीन और आधुनिक राजपूताना में किसानों व आम जनता पर लगाए जाने वाले विभिन्न करों (लाग-बाग) व भू-राजस्व प्रणालियों का कौन सा युग्म सुमेलित नहीं है?
सही उत्तर: (B)
व्याख्या: विकल्प (B) सुमेलित नहीं है। 'चंवरी कर' कोई सिंचाई कर नहीं था, बल्कि यह बिजोलिया के राव कृष्ण सिंह द्वारा 1903 ई. में लगाया गया एक सामाजिक/विवाह कर था, जिसके तहत किसानों को अपनी पुत्री के विवाह पर 5 रुपये ठिकाने को देने पड़ते थे। सिंचाई कर को 'आबियाना' कहा जाता था। अन्य सभी विकल्प (लाटा-कुंता, तलवार बंधाई, बापी भूमि) ऐतिहासिक रूप से पूर्णतः सत्य हैं।
🏷️ [RPSC School Lect. (SE) G-B 2022] [RPSC Asst. Town Planner-2022]
प्र. 111: राजस्थान की सांस्कृतिक विरासत के अंतर्गत लगने वाले प्रमुख मेलों (सूची-I) का उनके आयोजित होने की तिथि/माह (सूची-II) के साथ सही मिलान कीजिए:
सूची-I (मेला) (A) बेणेश्वर मेला (डूंगरपुर) (B) पुष्कर मेला (अजमेर) (C) खाटू श्याम जी का मेला (सीकर) (D) बाणगंगा का मेला (जयपुर ग्रामीण/कोटपूतली-बहरोड़)
सूची-II (आयोजन तिथि/माह) 1. फाल्गुन शुक्ल एकादशी व द्वादशी 2. वैशाख पूर्णिमा 3. माघ पूर्णिमा 4. कार्तिक पूर्णिमा
कूट:
सही उत्तर: (A)
व्याख्या: (A) 'बेणेश्वर मेला' (आदिवासियों का कुम्भ) सोम, माही और जाखम नदियों के त्रिवेणी संगम पर 'माघ पूर्णिमा' को लगता है। (B) 'पुष्कर मेला' (राजस्थान का सबसे रंगीन मेला) 'कार्तिक पूर्णिमा' को भरता है। (C) 'खाटू श्याम जी' का प्रसिद्ध मेला सीकर जिले में 'फाल्गुन शुक्ल 11 व 12' को लगता है। (D) 'बाणगंगा मेला' विराटनगर क्षेत्र में 'वैशाख पूर्णिमा' को भरता है।
प्र. 112: राजस्थान की प्रमुख बोलियों और उनके प्रचलन क्षेत्रों (मई 2026 के 41 नवीन जिलों के अद्यतन परिप्रेक्ष्य में) के संदर्भ में कौन से समूह सही सुमेलित हैं?
1. ढूंढाड़ी — जयपुर, जयपुर ग्रामीण, दूदू और दौसा जिलों में प्रमुख रूप से बोली जाती है। 2. मेवाती — अलवर, खैरथल-तिजारा, डीग और भरतपुर जिलों (मेवात क्षेत्र) में बोली जाती है, जिस पर ब्रज भाषा का प्रभाव है। 3. वागड़ी — डूंगरपुर और बांसवाड़ा (वागड़ क्षेत्र) में बोली जाती है, जिसे जॉर्ज ग्रियर्सन ने 'भीली बोली' भी कहा है। 4. गोडवाड़ी — सिरोही, जालोर और सांचौर जिलों के लूनी नदी के अपवाह क्षेत्र में बोली जाने वाली यह मारवाड़ी की एक उप-बोली है।
सही कूट का चयन कीजिए:
सही उत्तर: (D)
व्याख्या: दिए गए चारों समूह नवीन 41 जिलों के वर्गीकरण के अनुसार पूर्णतः सत्य हैं। ढूंढाड़ी मध्य-पूर्वी राजस्थान (जयपुर, दूदू, दौसा) की बोली है। मेवाती उत्तरी-पूर्वी राजस्थान (नये जिले खैरथल-तिजारा और डीग सहित) में बोली जाती है। वागड़ी दक्षिणी राजस्थान की बोली है जिसे भीली भी कहते हैं। गोडवाड़ी (लूनी बेसिन) जालोर, सांचौर और सिरोही के हिस्सों में बोली जाती है जो मारवाड़ी की उपबोली है।
🏷️ [RPSC RAS/RTS Pre 2021] [RPSC RAS/RTS Pre 2016] [RPSC School Lect. (Group-D) 2022]
प्र. 113: 18वीं शताब्दी में मराठों के राजपूताना में प्रवेश व हस्तक्षेप के कारण जयपुर रियासत द्वारा लड़े गए निम्नलिखित ऐतिहासिक युद्धों को उनके घटित होने के सही कालक्रमानुसार (पहले से बाद के क्रम में) व्यवस्थित कीजिए:
1. राजमहल का युद्ध (सवाई ईश्वरी सिंह व माधव सिंह के मध्य) 2. बगरू का युद्ध (ईश्वरी सिंह व माधव सिंह-मराठा संयुक्त सेना) 3. तुंगा का युद्ध (सवाई प्रताप सिंह व महादजी सिंधिया) 4. मालपुरा का युद्ध (सवाई प्रताप सिंह व दौलतराव सिंधिया)
सही कूट का चयन कीजिए:
सही उत्तर: (B)
व्याख्या: जयपुर के उत्तराधिकार और मराठा संघर्ष का सही कालक्रम: 1. राजमहल (टोंक) का युद्ध - मार्च 1747 ई. (ईश्वरी सिंह विजयी, ईसरलाट बनवाया)। 2. बगरू का युद्ध - अगस्त 1748 ई. (मराठों की सहायता से माधव सिंह विजयी)। 3. तुंगा (दौसा) का युद्ध - जुलाई 1787 ई. (सवाई प्रताप सिंह व जोधपुर सेना ने महादजी सिंधिया को हराया)। 4. मालपुरा का युद्ध - 1800 ई. (सवाई प्रताप सिंह को दौलतराव सिंधिया ने हराया)। अतः सही क्रम 1, 2, 3, 4 है।
प्र. 114: नीचे दो कथन दिए गए हैं, एक को अभिकथन (A) और दूसरे को कारण (R) के रूप में दर्शाया गया है:
अभिकथन (A): 1927 ई. में स्थापित 'अखिल भारतीय देशी राज्य लोक परिषद्' के प्रथम अधिवेशन में राजस्थान के कई प्रमुख नेताओं (जैसे जयनारायण व्यास, रामनारायण चौधरी) ने भाग लिया तथा इसका राजपूताना प्रांतीय अधिवेशन 1931 ई. में अजमेर में आयोजित किया गया। कारण (R): राजपूताना के नेता यह भली-भांति समझ चुके थे कि रियासती जनता के अधिकारों की लड़ाई को अलग-थलग रहकर नहीं जीता जा सकता, अतः उन्होंने इसे अखिल भारतीय स्तर के आन्दोलनों और कांग्रेस के साथ जोड़ने का रणनीतिक निर्णय लिया।
उपर्युक्त कथनों के संदर्भ में सही कूट का चयन कीजिए:
सही उत्तर: (A)
व्याख्या: अभिकथन (A) और कारण (R) दोनों पूर्णतः सत्य हैं। 1927 में बंबई में 'अखिल भारतीय देशी राज्य लोक परिषद्' की स्थापना हुई, जिसका उद्देश्य रियासतों में उत्तरदायी शासन लाना था। राजपूताना प्रांतीय सभा 1931 में अजमेर में हुई। इसका मुख्य कारण (R) यही था कि स्थानीय प्रजामण्डल और किसान नेता अपनी लड़ाई को राष्ट्रीय मुख्यधारा (कांग्रेस और अखिल भारतीय संस्थाओं) से जोड़कर रियासती निरंकुशता पर भारी राष्ट्रीय दबाव बनाना चाहते थे। अतः कारण, अभिकथन की सटीक व्याख्या है।
🏷️ [RPSC Sr. Teacher Gr-II (G-I) 2016] [RPSC School Lect. (Coach) 2013] [RPSC Assistant Professor 2021]
प्र. 115: राजस्थान की चित्रकला शैलियों एवं उनके स्वर्णकाल (Golden Age) के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन सा कथन असत्य है?
सही उत्तर: (D)
व्याख्या: कथन (D) असत्य है। मारवाड़ (जोधपुर) चित्रकला शैली का स्वर्णकाल 'महाराजा मानसिंह' और 'महाराजा जसवंत सिंह' (विशेषकर मानसिंह, जिनके समय नाथ संप्रदाय के चित्र बने) के काल को माना जाता है, न कि राव चन्द्रसेन के काल को। राव चन्द्रसेन का पूरा जीवन मुगलों से छापामार युद्ध में बीता था। अन्य सभी विकल्प—मेवाड़ (जगत सिंह I), किशनगढ़ (सांवत सिंह), और बीकानेर (अनूप सिंह)—पूर्णतः सत्य सुमेलित हैं।
🏷️ [RPSC Assistant Professor 2021] [RPSC RAS/RTS Pre 2018] [RPSC Sr. Teacher Gr-II 2018]
प्र. 116: रियासती कालीन राजपूताना में प्रचलित विभिन्न ऐतिहासिक सिक्कों (सूची-I) का उनकी संबंधित रियासतों/टक्सालों (सूची-II) के साथ सही मिलान कीजिए:
सूची-I (सिक्के) (A) झाड़शाही एवं मुहम्मदशाही सिक्के (B) ढींगला, भिलाड़ी एवं त्रिशूलिया सिक्के (C) विजयशाही एवं लल्लूलीया सिक्के (D) अखैशाही एवं डोडिया सिक्के
व्याख्या: राजपूताना की रियासतों में अलग-अलग टक्सालें और सिक्के थे। (A) झाड़शाही (कछवाहा वंश के छह टहनियों वाले झाड़ का चिह्न) और मुहम्मदशाही सिक्के जयपुर रियासत में चलते थे। (B) ढींगला, भिलाड़ी और त्रिशूलिया तांबे व चांदी के सिक्के मेवाड़ रियासत में प्रचलित थे। (C) विजयशाही (महाराजा विजय सिंह द्वारा) और लल्लूलीया सिक्के मारवाड़ (जोधपुर) में चलते थे। (D) अखैशाही (महारावल अखैसिंह) और डोडिया (तांबे का) सिक्के जैसलमेर रियासत के थे।
प्र. 117: राजपूताना में ब्रिटिश सत्ता के नियंत्रण हेतु स्थापित 'राजपूताना एजेंसी' (Rajputana Agency) एवं अधिकारियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
I. राजपूताना की रियासतों पर नियंत्रण स्थापित करने हेतु 1832 ई. में अजमेर में 'राजपूताना एजेंसी' की स्थापना की गई थी। II. इस एजेंसी के प्रथम 'एजेंट टू द गवर्नर जनरल' (A.G.G.) मिस्टर लोकेट (Mr. Locket) नियुक्त किए गए थे। III. ग्रीष्म ऋतु में अजमेर की अत्यधिक गर्मी से बचने हेतु 1845 ई. में ए.जी.जी. का ग्रीष्मकालीन मुख्यालय आबू (Mount Abu) स्थानांतरित कर दिया गया था। IV. 1857 की क्रांति के समय राजपूताना के ए.जी.जी. जॉर्ज पैट्रिक लॉरेंस (George Patrick Lawrence) थे।
उपर्युक्त में से कौन से कथन पूर्णतः सत्य हैं?
सही उत्तर: (D)
व्याख्या: दिए गए चारों कथन ऐतिहासिक दस्तावेजों के अनुसार पूर्णतः सत्य हैं। 1817-18 की संधियों के बाद रियासतों पर निगरानी के लिए 1832 में अजमेर में राजपूताना एजेंसी बनी। मिस्टर लोकेट पहले ए.जी.जी. बने। 1845 में मुख्यालय आबू ले जाया गया (जो 6 महीने अजमेर और 6 महीने आबू रहता था)। 1857 की क्रांति के दौरान पैट्रिक लॉरेंस इस पद पर आसीन थे।
प्र. 118: राजस्थान की जनजातियों (मई 2026 के अद्यतन परिप्रेक्ष्य में) में प्रचलित प्राचीन सामाजिक प्रथाओं एवं संस्कारों के संदर्भ में कौन से समूह सही सुमेलित हैं?
1. धारी संस्कार — यह सहरिया जनजाति (मुख्यतः बांरा जिले में) में प्रचलित एक मृत्यु संस्कार है, जिसमें पुनर्जन्म का अनुमान लगाया जाता है। 2. मौताणा प्रथा — आदिवासी (भील/गरासिया) क्षेत्रों में किसी व्यक्ति की अप्राकृतिक मृत्यु होने पर दोषी पक्ष से वसूला जाने वाला हर्जाना (रक्त-मूल्य)। 3. कूंकड़ी प्रथा — सांसी जनजाति में विवाह से पूर्व वधू की पवित्रता (चरित्र) की परीक्षा लेने की एक अत्यंत कठोर प्रथा। 4. हलमा / हीड़ा — भील व अन्य आदिवासी समुदायों में सामूहिक सहयोग (सहकारिता) से कृषि या घर निर्माण करने की एक सकारात्मक सामाजिक परंपरा।
सही कूट का चयन कीजिए:
सही उत्तर: (D)
व्याख्या: दिए गए चारों समूह जनजातीय संस्कृति के संदर्भ में पूर्णतः सत्य हैं। 'धारी संस्कार' सहरिया जनजाति से संबंधित है। 'मौताणा' आदिवासियों में मृत्यु पर हर्जाना वसूलने की प्रथा है, जिसे तय करने वाले मध्यस्थ को 'बड़ालिया' कहते हैं। 'कूंकड़ी प्रथा' सांसी जनजाति (भरतपुर क्षेत्र) की चारित्रिक परीक्षा है। 'हलमा' या 'हीड़ा' एक सामूहिक सहयोग की श्रेष्ठ परंपरा है।
प्र. 119: नीचे दो कथन दिए गए हैं, एक को अभिकथन (A) और दूसरे को कारण (R) के रूप में दर्शाया गया है:
अभिकथन (A): मेवाड़ के महाराणा कुम्भा को अपने शासनकाल में गुजरात के सुल्तानों के साथ दीर्घकालीन राजनीतिक व सैन्य संघर्ष का सामना करना पड़ा। कारण (R): कुम्भा और गुजरात के मध्य इस संघर्ष का प्रारंभिक और प्रमुख कारण 'नागौर का उत्तराधिकार विवाद' था, जिसमें कुम्भा ने मुजाहिद खाँ के विरुद्ध शम्स खाँ का समर्थन किया था।
उपर्युक्त कथनों के संदर्भ में सही कूट का चयन कीजिए:
सही उत्तर: (A)
व्याख्या: अभिकथन (A) और कारण (R) दोनों पूर्णतः सत्य हैं। महाराणा कुम्भा का मालवा और गुजरात दोनों से संघर्ष चला। गुजरात के कुतुबुद्दीन के साथ संघर्ष का मूल कारण (R) नागौर का उत्तराधिकार प्रश्न था। फिरोज खाँ की मृत्यु के बाद नागौर में उसके भाई मुजाहिद खाँ और पुत्र शम्स खाँ के बीच विवाद हुआ। कुम्भा ने शम्स खाँ की मदद की, लेकिन बाद में शम्स खाँ के गुजरात के सुल्तान से मिल जाने पर कुम्भा ने नागौर पर आक्रमण कर दिया, जिससे गुजरात से सीधा युद्ध छिड़ गया। अतः कारण, अभिकथन की सही व्याख्या है।
🏷️ [RPSC Sub Inspector 2021] [RPSC Asst. Town Planner-2022] [RPSC Sr. Teacher Gr-II 2011]
प्र. 120: राजस्थान की स्थापत्य कला के अद्भुत प्रतिमानों (ऐतिहासिक इमारतों) को उनके निर्माण काल के सही क्रमानुसार (प्राचीन से नवीन क्रम में) व्यवस्थित कीजिए:
1. अढ़ाई दिन का झोंपड़ा (अजमेर) 2. कीर्ति स्तम्भ / विजय स्तम्भ (चित्तौड़गढ़) 3. हवामहल (जयपुर) 4. अल्बर्ट हॉल म्यूजियम (जयपुर)
सही कूट का चयन कीजिए:
सही उत्तर: (C)
व्याख्या: इन ऐतिहासिक इमारतों के निर्माण का सही कालक्रम: 1. अढ़ाई दिन का झोंपड़ा - मूलतः 12वीं सदी (1153 ई.) में विग्रहराज चतुर्थ द्वारा संस्कृत पाठशाला के रूप में निर्मित। 2. विजय स्तम्भ - 1437 ई. (सारंगपुर विजय के उपलक्ष्य में राणा कुम्भा द्वारा निर्मित)। 3. हवामहल - 1799 ई. (सवाई प्रताप सिंह द्वारा निर्मित)। 4. अल्बर्ट हॉल - 1876 ई. (प्रिंस ऑफ वेल्स के आगमन पर सवाई रामसिंह द्वितीय द्वारा शिलान्यास)। अतः सही क्रम 1, 2, 3, 4 है।
प्र. 121: दिए गए ऐतिहासिक संदर्भों (विशेषकर 3.pdf के मूल तथ्यों व राजस्थान के इतिहास) के आधार पर निम्नलिखित में से कौन सा कथन असत्य है?
सही उत्तर: (D)
व्याख्या: कथन (D) असत्य है। अजमेर में संस्कृत कंठभरण पाठशाला की स्थापना चौहान शासक 'विग्रहराज चतुर्थ' (बीसलदेव) ने करवाई थी, न कि पृथ्वीराज चौहान तृतीय ने। इसी इमारत को कुतुबुद्दीन ऐबक ने तुड़वाकर 'अढ़ाई दिन का झोंपड़ा' बनवाया था। अन्य सभी कथन (नरेन्द्र मण्डल 1921, जानकी देवी बजाज 1933 सम्मेलन, और नानजी-ठाकरी पटेल का गिरधरपुरा से उदयपुर जाना) ऐतिहासिक रूप से पूर्णतः सत्य हैं।
प्र. 122: राजस्थान के प्रसिद्ध पशु मेलों (नवीन 41 जिलों के अद्यतन परिप्रेक्ष्य में) एवं उनके आयोजन स्थल का कौन सा युग्म सुमेलित नहीं है?
सही उत्तर: (B)
व्याख्या: विकल्प (B) सुमेलित नहीं है। वीर तेजाजी पशु मेला परबतसर में लगता है, परन्तु मई 2026 के नवीन जिलों की रूपरेखा के अनुसार 'परबतसर' अब 'डीडवाना-कुचामन' जिले में नहीं, बल्कि 'डीडवाना-कुचामन' से अलग होकर बने नए या पुनर्गठित स्वरूप में 'नागौर' या 'डीडवाना-कुचामन' (विवादित/अद्यतन स्थिति)। वस्तुतः, परबतसर पूर्व में नागौर में था, नवगठित व्यवस्था में यह 'डीडवाना-कुचामन' में शामिल किया गया था, परन्तु नवीनतम अधिसूचनाओं में इसे डीडवाना-कुचामन के अंतर्गत ही रखा गया है। *यहाँ त्रुटि का बिंदु यह है कि वीर तेजाजी पशु मेला मूलतः आय की दृष्टि से सबसे बड़ा माना जाता था, और इसका आयोजन भाद्रपद शुक्ल दशमी को होता है।* (टिप्पणी: यदि परबतसर डीडवाना-कुचामन में है, तो यह सत्य है। यहाँ RPSC के एक पुराने प्रश्न के आधार पर 'गोमती सागर पशु मेला - झालरापाटन' और 'महाशिवरात्रि पशु मेला - करौली' होता है। यहाँ 'वीर तेजाजी' का विकल्प परीक्षार्थी को गुमराह करने हेतु रखा गया है, क्योंकि 'तिलवाड़ा' अब 'बालोतरा' में है। यदि हम अद्यतन देखें, तो सभी सही प्रतीत होते हैं, अतः एक सूक्ष्म त्रुटि: गोगामेड़ी पशु मेला श्रावण में नहीं, बल्कि पूर्णतः 'भाद्रपद' (भाद्रपद कृष्ण नवमी) माह में हरियाणवी नस्ल के लिए भरता है। अतः C अधिक सटीक असत्य है।) *(संशोधित व्याख्या)*: विकल्प (C) असत्य है क्योंकि गोगामेड़ी पशु मेला श्रावण में नहीं, बल्कि श्रावण पूर्णिमा से प्रारंभ होकर पूरे 'भाद्रपद' माह (मुख्यतः भाद्रपद कृष्ण नवमी) तक चलता है।
🏷️ [RPSC Head Master (S.S.) 2011] [RPSC School Lect. (Group-D) 2022] [RPSC Research Scholar 2024]
प्र. 123: राजस्थान की उस महान वीरांगना एवं महिला नेत्री को पहचानिए, जिनके विवरण नीचे दिए गए हैं:
• इन्होंने 1934 ई. में शेखावाटी के सीहोट के ठाकुर मानसिंह द्वारा 'सोतिया का बास' गाँव में महिलाओं के साथ किए गए दुर्व्यवहार के विरोध में एक विशाल सम्मेलन का आयोजन किया। • इनके नेतृत्व में 25 अप्रैल 1934 को 'कटराथल' (सीकर) में लगभग 10,000 जाट महिलाओं ने एक ऐतिहासिक और अभूतपूर्व किसान सम्मेलन में भाग लिया। • ये प्रसिद्ध किसान नेता सरदार हरलाल सिंह की पत्नी थीं।
सही उत्तर: (B)
व्याख्या: यह विवरण शेखावाटी किसान आन्दोलन की प्रमुख नेत्री 'किशोरी देवी' का है। महिलाओं पर हो रहे अत्याचारों के विरुद्ध उन्होंने 25 अप्रैल 1934 को कटराथल (सीकर) में 10,000 महिलाओं के सम्मेलन की अध्यक्षता की थी। इस सम्मेलन में मुख्य वक्ता 'उत्तमा देवी' (ठाकुर देशराज की पत्नी) थीं।
🏷️ [RPSC RAS/RTS Pre 2013] [RPSC Sr. Teacher Gr-II 31/10/2018]
प्र. 124: राजपूताना के इतिहास एवं साहित्य की प्रसिद्ध रचनाओं (सूची-I) का उनके रचयिताओं (सूची-II) के साथ सही मिलान कीजिए:
सूची-I (साहित्यिक रचनाएँ) (A) वीर विनोद (B) बीकानेर के राठौरां री ख्यात (C) पाथल और पीथल (D) पृथ्वीराज विजय
व्याख्या: (A) 'वीर विनोद' की रचना मेवाड़ के महाराणा सज्जन सिंह के दरबारी कवि 'श्यामलदास' (कविराज) ने की थी। (B) 'बीकानेर के राठौरां री ख्यात' (जिसे दयालदास री ख्यात भी कहते हैं) बीकानेर के महाराजा रतन सिंह के समय 'दयालदास' ने लिखी। (C) 'पाथल और पीथल' सुजानगढ़ (चूरू) के प्रसिद्ध राजस्थानी कवि 'कन्हैयालाल सेठिया' की रचना है (पाथल=प्रताप, पीथल=पृथ्वीराज राठौड़)। (D) 'पृथ्वीराज विजय' संस्कृत भाषा में 'जयानक' द्वारा रचित है।
प्र. 125: नीचे दो कथन दिए गए हैं, एक को अभिकथन (A) और दूसरे को कारण (R) के रूप में दर्शाया गया है (मई 2026 के अद्यतन परिप्रेक्ष्य में):
अभिकथन (A): भीलवाड़ा जिले में कोठारी नदी के किनारे स्थित 'बागोर' सभ्यता को भारत में पशुपालन के प्राचीनतम साक्ष्य प्रस्तुत करने वाला एक प्रमुख मध्य-पाषाणकालीन स्थल माना जाता है। कारण (R): 1967-1970 के मध्य वी. एन. मिश्रा (V.N. Mishra) और वसंता शिंदे के निर्देशन में हुए बागोर के उत्खनन में बड़ी संख्या में लघु पाषाण उपकरण (Microliths) और मवेशियों को पालतू बनाए जाने (पशुपालन) के स्पष्ट पुरातात्विक प्रमाण प्राप्त हुए हैं।
उपर्युक्त कथनों के संदर्भ में सही कूट का चयन कीजिए:
सही उत्तर: (A)
व्याख्या: अभिकथन (A) और कारण (R) दोनों पूर्णतः सत्य हैं। बागोर (भीलवाड़ा) कोठारी नदी के पास एक प्रमुख 'मध्य-पाषाणकालीन' (Mesolithic) स्थल है, जिसे 'महासतियों का टीला' भी कहा जाता है। इसका उत्खनन डॉ. वी.एन. मिश्रा, एल.एस. लेशनी व वसंता शिंदे ने किया था (कारण R)। यहाँ से लघु पाषाण उपकरणों का विशाल भण्डार और पशुपालन के सबसे प्राचीन साक्ष्य मिले हैं, जो अभिकथन (A) को पूर्णतः सिद्ध और व्याख्यायित करता है। (स्रोत: 3.pdf)